राजधानी: जयपुर में खेल प्रशासन से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में चल रहा सीआरसी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा गठित एडहॉक कमेटी के चार सदस्यों—धनंजय सिंह खींवसर, आशीष तिवाड़ी, पिंकेश जैन और मोहित यादव—ने मौजूदा कन्वीनर दीनदयाल कुमावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चारों ने सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर कुमावत को पद से हटाने और नए कन्वीनर की नियुक्ति की मांग की है।
एडहॉक कमेटी के सदस्यों का आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को दीनदयाल कुमावत ने RCA को राजस्थान सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1959 की धारा 17(2) के तहत ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत कराने के लिए आवेदन किया। जबकि RCA पहले से ही राजस्थान खेल अधिनियम-2005 के तहत पंजीकृत संस्था है और वर्तमान में उसका संचालन रजिस्ट्रार द्वारा गठित एडहॉक कमेटी कर रही है।
चारों सदस्यों का कहना है कि ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण का यह कदम नियमों के विपरीत है। यदि पंजीकरण हो जाता है तो RCA की संरचना बदल जाएगी और ट्रस्टी के रूप में दीनदयाल कुमावत की भूमिका प्रमुख हो जाएगी, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
विवाद को और गंभीर बनाते हुए एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने पत्र में उल्लेख किया कि 5 फरवरी 2026 को जिस दिन ट्रस्ट पंजीकरण फॉर्म नोटरी कराया गया, उसी दिन राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने सिविल रिट याचिका संख्या 2564/2026 (देवी सिंह बनाम राजस्थान राज्य व अन्य) में आदेश पारित कर दीनदयाल कुमावत को एडहॉक कमेटी के कन्वीनर के रूप में कार्य करने से रोक दिया था।
चारों सदस्यों का दावा है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद संयोजक के रूप में आवेदन करना न्यायालय की अवहेलना की श्रेणी में आता है। ऐसे में उन्होंने कुमावत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिछले करीब 20 दिनों से RCA के बैंक खाते संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इससे जीएसटी, टीडीएस और अन्य करों का भुगतान समय पर नहीं हो सका है। इसके अलावा, याचिका संख्या 64/2011 के तहत सर्विस टैक्स से जुड़े मासिक भुगतान भी प्रभावित हुए हैं।
यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो पेनल्टी, ब्याज और बैंक खातों के सील होने जैसी प्रशासनिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। एडहॉक कमेटी के सदस्यों ने इसे RCA के सुचारू संचालन के लिए गंभीर खतरा बताया है।
इस पूरे विवाद से पहले नेता प्रतिपक्ष जूली ने भी RCA प्रकरण पर सवाल उठाते हुए जल्द चुनाव कराने की मांग की थी। उनका तर्क था कि लंबे समय से चल रही अस्थायी व्यवस्था से खेल प्रशासन प्रभावित हो रहा है।
अब जब एडहॉक कमेटी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, तो यह विवाद और गहरा गया है। खेल जगत में चर्चा है कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सियासी रंग भी ले चुका है।
चारों सदस्यों ने रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान से अनुरोध किया है कि RCA के नियमित संचालन के लिए शीघ्र नए कन्वीनर की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो RCA को अनावश्यक वित्तीय दंड और प्रशासनिक संकट झेलना पड़ सकता है।
इस घटनाक्रम ने राजस्थान क्रिकेट की सियासत को फिर गरमा दिया है। अब सबकी निगाहें सहकारिता विभाग और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या नए कन्वीनर की नियुक्ति होगी? क्या ट्रस्ट पंजीकरण का आवेदन निरस्त होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में RCA की दिशा तय करेंगे।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में जारी विवाद केवल पद और प्रक्रिया का मुद्दा नहीं, बल्कि खेल प्रशासन की पारदर्शिता और वैधानिकता से जुड़ा मामला है। हाईकोर्ट आदेश, ट्रस्ट पंजीकरण और बैंक खातों के संचालन जैसे मुद्दों ने स्थिति को जटिल बना दिया है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो इसका असर राज्य के क्रिकेट ढांचे पर पड़ सकता है।
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