पंजाब: में एक महिला के साथ कथित पुलिस ज्यादती का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंची तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की, सिर पर जूतियां मारीं और हार्ट पेशेंट होने के बावजूद उसे फर्श पर पैरों के बल बैठने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, महिला का कहना है कि उसे धमकी दी गई कि “अभी तो कुछ नहीं हुआ, जब रात की ड्यूटी वाला नशे में आएगा, तब देखना क्या होगा।”
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब महिला अपनी आपबीती लेकर पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल के पास पहुंची। सुनवाई के दौरान महिला की हालत और उसके आरोपों को सुनकर चेयरपर्सन भी आक्रोशित हो गईं। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और संबंधित दिन की पूरी CCTV फुटेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान महिला ने बताया, “मैडम, एक महिला पुलिसकर्मी ने मुझे थप्पड़ मारे, कान पर मारा। पीछे से डंडे भी मारे गए। फिर एक अफसर आए और उन्होंने भी थप्पड़ जड़ दिए। मैं हाथ जोड़ती रही, लेकिन किसी को दया नहीं आई। मेरे सिर पर जूतियां मारी गईं। मैं बेहोश हो गई थी।”
महिला ने आगे कहा कि उसने पुलिसकर्मियों को बताया था कि वह हार्ट पेशेंट है और उसका ऑपरेशन हो चुका है। इसके बावजूद उसे फर्श पर पैरों के बल बैठने के लिए मजबूर किया गया। “मैंने कहा कि ऐसे बैठने से ब्लीडिंग हो जाती है, लेकिन उन्होंने नहीं सुना। जब बैठी तो सच में ब्लीडिंग शुरू हो गई,” उसने कहा।
महिला के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने उसे डराते हुए कहा कि रात में जब दूसरा मुलाजिम शराब पीकर आएगा, तब उसके साथ और भी बुरा हो सकता है। इस कथित धमकी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
सुनवाई के दौरान चेयरपर्सन ने आरोपी पुलिसकर्मी से सीधे सवाल किया, “अगर यही सब तुम्हारे साथ किया जाए तो कैसा लगेगा? क्या तुम्हें जरा भी अफसोस है?” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर आरोप सही साबित हुए तो केवल लाइन हाजिर करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
चेयरपर्सन राज लाली गिल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित दिन की पूरी CCTV फुटेज आयोग को सौंपी जाए। उन्होंने कहा, “जब फुटेज सामने आएगी, तब सच्चाई साफ हो जाएगी। अगर महिला के आरोप सही निकले तो दोषी की वर्दी उतरवाने तक की सिफारिश करूंगी।”
हालांकि, उन्होंने जिले और थाने का नाम उजागर करने से इनकार किया। उनका कहना है कि इससे पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो सकती है, जो उसके हित में नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से वह समाज को यह संदेश देना चाहती हैं कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। महिला आयोग की सख्ती के बाद अब सभी की निगाहें CCTV फुटेज और विभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
महिला आयोग का कहना है कि पीड़िता बेहद मानसिक आघात में थी और उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह मामला केवल एक महिला की शिकायत नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्पष्ट संदेश होगा कि वर्दी के पीछे छिपकर किसी भी तरह की ज्यादती स्वीकार्य नहीं है। महिला आयोग की सख्ती से उम्मीद जगी है कि सच सामने आएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
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