राजस्थान विधानसभा: में गुरुवार को अजमेर में नियम विरुद्ध पट्टे जारी किए जाने के मामले ने जोर पकड़ा। इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए यूडीएच मंत्री Jhabar Singh Kharra ने अजमेर नगर निगम के एक RAS अधिकारी सहित चार कर्मचारियों को एपीओ (Awaiting Posting Orders) करने की घोषणा की।
मंत्री ने यह घोषणा विधानसभा में निर्दलीय विधायक Ravindra Singh Bhati के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में की। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों में जारी किए गए सभी पट्टों की विस्तृत जांच करवाई जाएगी।
यूडीएच मंत्री ने विधानसभा में कहा कि अजमेर में नियमों के खिलाफ पट्टे जारी करने की शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
मंत्री ने बताया कि Ajmer के कलेक्टर को निर्देश दिया गया है कि पिछले छह महीनों में जारी किए गए सभी पट्टों की जांच की जाए और दो सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सरकार को भेजी जाए।
सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं। इसी आधार पर अजमेर नगर निगम की डिप्टी कमिश्नर सहित चार कर्मचारियों को एपीओ कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी होने से सरकारी जमीन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस मुद्दे के अलावा विधानसभा में कई अन्य मामलों को लेकर भी पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सरकारी भवनों के उद्घाटन और शिलान्यास को लेकर भी सवाल उठे।
स्वास्थ्य मंत्री Gajendra Singh Khimsar और उपनेता प्रतिपक्ष Ramkesh Meena के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
विपक्ष का आरोप था कि राजस्थान में कई जगह चुनाव हार चुके नेताओं से भी सरकारी भवनों का उद्घाटन करवाया जा रहा है। वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिना विभागीय अनुमति के किए गए उद्घाटनों की जिम्मेदारी विभाग की नहीं है।
विधानसभा में केकड़ी अस्पताल की एमसीएच विंग के उद्घाटन को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। भाजपा विधायक Shatrughan Gautam ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने अधूरे भवन का जल्दबाजी में उद्घाटन कर दिया था।
उन्होंने कहा कि अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हुआ था, फिर भी उद्घाटन कर दिया गया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि विभाग से इसकी अनुमति नहीं ली गई थी और औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ था।
हालांकि विधायक ने इस जवाब को गलत बताते हुए कहा कि अस्पताल में अब भी उद्घाटन की शिलापट्ट लगी हुई है, जिसमें पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेताओं के नाम दर्ज हैं।
इसी दौरान विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव भी पेश किया गया। पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता खत्म करने के लिए दो अलग-अलग संशोधन बिल पेश किए गए।
पंचायतीराज मंत्री Madan Dilawar ने पंचायतीराज संशोधन बिल पेश किया, जबकि यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने नगरपालिका संशोधन बिल विधानसभा में रखा।
इन बिलों में सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पार्षद, मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष जैसे पदों के चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की शर्त हटाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि इन विधेयकों पर जल्द ही विधानसभा में चर्चा करवाई जाएगी और इन्हें पारित करवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
प्रश्नकाल के दौरान राशन की दुकानों के आवंटन को लेकर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक सुरेश मोदी ने आरोप लगाया कि नीमकाथाना क्षेत्र में राशन दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
मंत्री ने जवाब दिया कि कुछ आवेदनों पर कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है। इस पर विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब नियम तय हैं तो मार्गदर्शन की जरूरत क्यों पड़ रही है।
राजस्थान विधानसभा में अजमेर पट्टा मामले को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए RAS अधिकारी समेत चार कर्मचारियों को एपीओ कर दिया है। साथ ही पिछले छह महीनों में जारी सभी पट्टों की जांच के आदेश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विधानसभा में कई अन्य मुद्दों को लेकर भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
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