कोटा / रामगंजमंडी: राजस्थान की राजनीति और सामाजिक सरोकारों के लिहाज से एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोटा में गो अभयारण्य बनाए जाने की घोषणा की है। यह घोषणा कोटा के रामगंजमंडी में आयोजित श्रीराम कथा और गो माता महाउत्सव के भव्य मंच से की गई, जिसे प्रदेश में गो संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद जनसमूह में उत्साह और समर्थन का माहौल देखने को मिला। यह आयोजन अब केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना और गौ सेवा का सशक्त मंच बनकर उभरा है।
इस अवसर पर उपस्थित लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि श्रीराम कथा के माध्यम से गौ माता के संरक्षण और गौ सेवा का संदेश देशभर में पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कथाएं समाज को धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ाने का कार्य करती हैं।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य के साथ राम कथा और गो माता महाउत्सव का आयोजन किया गया था, उसके सकारात्मक और ठोस परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन समाज को धर्म, संस्कृति और सेवा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है और मुख्यमंत्री का निर्णय इस भावना को और मजबूत करता है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने भी मुख्यमंत्री की घोषणा को बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गो संरक्षण और संवर्धन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलेगा।
रामगंजमंडी में आयोजित बागेश्वर धाम के आचार्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री की श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। दूर-दराज़ के गांवों और जिलों से लोग कथा सुनने पहुंच रहे हैं। पूरा क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह संकेत दे रही है कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी बड़ा केंद्र बन चुका है।
कोटा में गो अभयारण्य बनाने की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा राजस्थान में गो संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम मानी जा रही है। रामगंजमंडी की श्रीराम कथा और गो माता महाउत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहकर सामाजिक जागरूकता, गौ सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रभावशाली मंच बन चुका है। यह फैसला आने वाले समय में कोटा और पूरे राजस्थान की पहचान को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
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