उत्तर प्रदेश। भले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारी तेज कर दी है। कैंडिडेट सिलेक्शन को लेकर पार्टी ने पहले चरण का बड़ा सर्वे शुरू कराने का फैसला लिया है। इस सर्वे की जिम्मेदारी चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी ‘नेशन विद नमो’ को सौंपी गई है।
पार्टी के सीनियर नेताओं के मुताबिक, इस सर्वे की रिपोर्ट टिकट बंटवारे में निर्णायक भूमिका निभाएगी। जिन मौजूदा विधायकों की छवि या कार्यशैली पर नेगेटिव रिपोर्ट आएगी, उनका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।
सर्वे एजेंसी हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर:
मौजूदा विधायक की छवि
क्षेत्र में उनकी सक्रियता
जनता की संतुष्टि या नाराजगी
वैकल्पिक दावेदारों की स्वीकार्यता
स्थानीय चुनावी मुद्दे
पर विस्तार से रिपोर्ट तैयार करेगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस सर्वे को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि फिल्टर सिस्टम के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने जार्विस और ए बिलियन माइंड (ABM) जैसी एजेंसियों से सर्वे कराया था।
इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर:
403 सीटों में से 165 सीटों पर नए चेहरे उतारे गए
120 से अधिक विधायकों के टिकट काटे गए
अब 2027 में भी पार्टी इसी रणनीति को और सख्ती से लागू करने की तैयारी में है।
एजेंसी के सर्वेयर विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं। ये सर्वेयर:
जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष
2022 और 2024 के विस्तारक कार्यकर्ता
दुकानदार, छोटे सामाजिक संगठन
वकील, डॉक्टर, शिक्षक
युवा और महिला मतदाता
से सीधी बातचीत कर रहे हैं।
एजेंसी से जुड़े एक कर्मचारी के मुताबिक,
“हम सार्वजनिक जगहों पर लोगों से बातचीत शुरू करते हैं और धीरे-धीरे मौजूदा विधायक या पूर्व प्रत्याशी पर चर्चा करते हैं। इससे जनता की असली राय सामने आती है।”
इस बार सर्वे में संघ (RSS) की भूमिका भी अहम रखी गई है।
सर्वे एजेंसी के कर्मचारी:
RSS के स्थानीय पदाधिकारियों
भाजपा संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं
से भी संपर्क कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया जाएगा कि:
कार्यकर्ताओं में विधायक को लेकर सहमति है या नाराजगी
संघ का रुख सकारात्मक है या नहीं
पार्टी नेतृत्व इन बिंदुओं को टिकट वितरण में गंभीरता से देखेगा।
भाजपा पदाधिकारियों के मुताबिक, प्रत्याशी चयन से पहले दूसरे चरण का सर्वे भी कराया जाएगा।
संभावना है कि यह सर्वे किसी दूसरी एजेंसी से कराया जाए, ताकि रिपोर्ट निष्पक्ष और संतुलित रहे।
दो एजेंसियों की रिपोर्ट के मिलान से यह साफ हो जाएगा कि:
कौन-सी सीट मजबूत है
कहां उम्मीदवार बदलने की जरूरत है
कहां अंदरूनी विरोध है
दोनों सर्वे एजेंसियों के कुल 800 से अधिक सर्वे एजेंट मैदान में उतरेंगे।
इनमें शामिल हैं:
दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र के छात्र
IIM लखनऊ
IIT कानपुर के विद्यार्थी
प्रोफेशनल सर्वे के जरिए सामाजिक समीकरण, अंदरूनी गुटबाजी और क्षेत्रीय मुद्दों की गहराई से जांच की जा रही है।
भाजपा के पास फिलहाल यूपी में 258 विधायक हैं, लेकिन पार्टी सर्वे 403 विधानसभा सीटों पर करा रही है।
इसमें सहयोगी दलों की सीटें भी शामिल हैं:
रालोद
सुभासपा
अपना दल (एस)
निषाद पार्टी
2017 और 2022 के बाद भाजपा 2027 में भी यूपी में पूर्ण बहुमत के साथ हैट्रिक लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी—तीनों पर चुनाव जिताने की बड़ी जिम्मेदारी है।
वहीं, समाजवादी पार्टी PDA फॉर्मूला के जरिए भाजपा को चुनौती दे रही है, जिसका तोड़ निकालना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
UP विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हों, लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार टिकट काम, छवि और संगठन-संघ की राय के आधार पर ही मिलेगा। नेगेटिव रिपोर्ट वाले विधायकों के लिए यह सर्वे खतरे की घंटी है। आने वाले महीनों में यह सर्वे यूपी की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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