जोधपुर। राजस्थान की सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट वाहनों और परिवहन विभाग में फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर वर्षों से चल रहे ‘जुगाड़ सिस्टम’ पर अब पूरी तरह से रोक लगने जा रही है। Rajasthan Vehicle Fitness Automated Testing को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह शामिल हैं, ने साफ कहा कि सड़क सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 अप्रैल के बाद पूरे राजस्थान में वाहनों की फिटनेस जांच केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशंस (ATS) के माध्यम से ही होगी। इसके बाद मैनुअल तरीके से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि मशीनों से की गई जांच का डेटा सीधे सर्वर पर जाता है, जिसे बदला नहीं जा सकता। इससे पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी।
राज्य सरकार ने एकल पीठ के 25 सितंबर 2025 के आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि वह ऑटोमेटेड सिस्टम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन संसाधनों और ढांचागत चुनौतियों के कारण इसे तुरंत हर जगह लागू करना संभव नहीं है।
खंडपीठ ने व्यावहारिक पहलू को देखते हुए सरकार को 15 अप्रैल तक का समय दिया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि इसके बाद किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि 15 अप्रैल के बाद यदि किसी जिले या क्षेत्र में एटीएस सेंटर सीमित संख्या में हैं, तब भी वाहन मालिकों को नजदीकी उपलब्ध सेंटर पर जाकर ही फिटनेस करानी होगी।
दूरी, सुविधा की कमी या अन्य किसी कारण के आधार पर मैनुअल जांच की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि हाईकोर्ट सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
कोर्ट ने एटीएस सेंटर स्थापित करने को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए—
20 लाख रुपए की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना अनिवार्य रहेगा।
एटीएस खोलने के लिए पहले से प्राप्त आवेदनों को 60 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
31 जुलाई 2025 से पहले प्राप्त आवेदनों पर 31 जनवरी तक निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
इस प्रकरण में राजस्थान के कुल 14 फिटनेस सेंटर्स प्रतिवादी के रूप में शामिल थे। इनमें जोधपुर, नागौर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, सिरोही और दौसा जिलों के प्रमुख फिटनेस सेंटर शामिल हैं।
इनमें नोखा का राजस्थान व्हीकल फिटनेस सेंटर, उदयपुर फिटनेस सेंटर, पीपाड़ सिटी का नवदीप फिटनेस टेस्ट सेंटर, जोधपुर का महादेव फिटनेस सेंटर सहित कई अन्य सेंटर शामिल हैं।
इस फैसले के दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे—
सख्ती:
अब हेडलाइट, ब्रेक, स्टीयरिंग, सस्पेंशन और प्रदूषण की जांच मशीनों से होगी। ‘सेटिंग’ या ‘सिफारिश’ की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी।
महंगाई:
एटीएस स्थापित करने की लागत करोड़ों में होती है, ऐसे में भविष्य में फिटनेस जांच शुल्क बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा:
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अनफिट और खतरनाक कॉमर्शियल वाहन सड़कों से हटेंगे, जिससे सड़क हादसों में कमी आएगी।
समय और दूरी:
कई वाहन मालिकों को फिटनेस के लिए दूसरे शहर जाना पड़ सकता है, जिससे समय और ईंधन का खर्च बढ़ सकता है।
Rajasthan Vehicle Fitness Automated Testing को लेकर हाईकोर्ट का यह फैसला परिवहन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। 15 अप्रैल के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट अब ‘कागजी औपचारिकता’ नहीं, बल्कि तकनीकी और पारदर्शी प्रक्रिया होगी। यह फैसला भले ही वाहन मालिकों के लिए कुछ असुविधा लेकर आए, लेकिन सड़क सुरक्षा और जनहित के लिहाज से इसे एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।
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