बुधवार रात को साध्वी की मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों की संख्या में भक्त अस्पताल पहुंच गए। इस दौरान साध्वी के पिता और आश्रम प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। पिता ने दावा किया कि गलत इंजेक्शन लगने से उनकी बेटी की जान गई है।
भक्त रुद्रप्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जब वे आरती नगर स्थित आश्रम पहुंचे, तब साध्वी के पिता शव को अंदर ले जाने से रोक रहे थे और मोबाइल फोन पुलिस को सौंपने से भी इनकार कर रहे थे। बाद में एसीपी छवि शर्मा ने साध्वी का मोबाइल अपने कब्जे में लिया।
भक्तों का यह भी आरोप है कि शव को मॉर्च्युरी ले जाते समय साध्वी के पिता ने निजी वाहन से उतरकर भागने की कोशिश की, हालांकि पुलिस ने उन्हें समझाया और एसीपी स्वयं शव के साथ एमजीएच मॉर्च्युरी पहुंचीं।
एसीपी (वेस्ट) छवि शर्मा के अनुसार, परिजनों ने बताया कि साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत पिछले दो दिनों से खराब थी। बुधवार को उन्होंने किसी से इंजेक्शन लगवाया, जिसके बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें पाल रोड स्थित प्रेक्षा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
साध्वी की मौत के करीब चार घंटे बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट से ‘अग्निपरीक्षा’ और ‘अलविदा’ से जुड़ी पोस्ट सामने आई। इससे यह सवाल उठने लगे कि जब साध्वी की मौत पहले हो चुकी थी, तो यह पोस्ट किसने और कैसे की। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
साध्वी की आखिरी पोस्ट में लिखी गई ‘न्याय’ और ‘अग्निपरीक्षा’ की बातों को जुलाई 2025 के उस मामले से जोड़ा जा रहा है, जिसमें उन्होंने अपने निजी स्टाफ पर ब्लैकमेलिंग और वीडियो वायरल कर बदनाम करने के आरोप लगाए थे।
पोस्टमॉर्टम के बाद शव सौंपे जाने को लेकर भी विवाद हुआ। साध्वी के पिता ने कागजात पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के अनुसार, साध्वी का अंतिम संस्कार जास्ती गांव में किया जाएगा, जहां उनकी जमीन स्थित है। हालांकि कुछ समर्थक परेऊ गांव में अंतिम संस्कार की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच में जुटी है। इंजेक्शन से मौत, सोशल मीडिया पोस्ट और पुराने विवाद—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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