उत्तर प्रदेश: के प्रयागराज में धार्मिक जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। झूंसी थाने में दर्ज इस मुकदमे के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है और पूछताछ के लिए एक टीम बनारस पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर उन्हें हिरासत में लेकर भी पूछताछ की जा सकती है।
इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे एक साजिश करार दिया है।
प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि माघ मेले के दौरान आश्रम में दो नाबालिग बच्चों (14 और 17 वर्ष) के साथ कथित रूप से यौन शोषण किया गया। शिकायत के अनुसार, यह कृत्य ‘गुरु सेवा’ के नाम पर कराया गया।
मामले में अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। ADJ (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद FIR दर्ज करने का आदेश दिया। शिकायत शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दायर की गई थी।
FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराएं 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 लगाई गई हैं। ये धाराएं नाबालिगों के साथ यौन अपराध और उससे संबंधित साजिश के मामलों में लागू होती हैं।
पुलिस का कहना है कि पीड़ितों के हलफनामे और प्रारंभिक जांच के आधार पर केस दर्ज किया गया है। अब साक्ष्य जुटाने और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
झूंसी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज होने के बाद पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। एक टीम साक्ष्य इकट्ठा कर रही है, जबकि दूसरी टीम पूछताछ के लिए बनारस पहुंची है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संबंधित दस्तावेजों, गुरुकुल के रिकॉर्ड और कथित छात्रों की पहचान की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्य भी खंगाले जा रहे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“जिन छात्रों की बात हो रही है, वे हमारे गुरुकुल के नहीं हैं। वे कभी हमारे यहां पढ़े ही नहीं। उनका पंजीकरण नहीं हुआ, न ही वे यहां अध्ययनरत रहे। पुलिस ने जो मार्कशीट जमा की है, उससे पता चला कि वे हरदोई के छात्र हैं। उनका हमारे गुरुकुल से कोई संबंध नहीं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा मामला उन्हें बदनाम करने और धार्मिक आवाजों को दबाने की कोशिश है।
शंकराचार्य ने राज्य सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा,
“देश में चार शंकराचार्य हैं जो सनातन धर्म की रक्षा करते आए हैं। अब उन पर प्रहार किया जा रहा है। हम गौ हत्या बंदी की आवाज बुलंद कर रहे हैं और सरकार जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ना चाहती है।”
उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई उनके सामाजिक और धार्मिक आंदोलनों से ध्यान हटाने के लिए की जा रही है।
यह मामला केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के संदर्भ में लगे आरोपों ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि मामला नाबालिगों से जुड़ा है, इसलिए जांच बेहद संवेदनशील और गोपनीय तरीके से की जाएगी।
अदालत ने प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया। अब आगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई तय होगी। यदि पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं की जांच कर रही है। गुरुकुल के रिकॉर्ड, कथित छात्रों की उपस्थिति, यात्रा विवरण और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही, शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज यौन शोषण FIR ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक ओर पुलिस जांच तेज कर रही है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य ने आरोपों को निराधार बताते हुए इसे साजिश करार दिया है। अब इस पूरे मामले में आगे की दिशा पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। सत्य क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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