जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्तियों को लेकर एक बार फिर बड़ा घोटाला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की तीन भर्ती परीक्षाओं में OMR शीट के अंकों से छेड़छाड़ कर 38 अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में RSSB के तकनीकी प्रमुख समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल है।
एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में संजय माथुर (तत्कालीन उपनिदेशक/सिस्टम एनालिस्ट, RSSB), प्रवीण गंगवाल (प्रोग्रामर, RSSB), आउटसोर्स फर्म के कर्मचारी शादान खान और विनोद कुमार गौड़ तथा अभ्यर्थी पूनम माथुर शामिल हैं।
संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल RSSB में OMR शीट स्कैनिंग और परीक्षा परिणाम तैयार करने की पूरी तकनीकी प्रक्रिया के प्रभारी थे। दोनों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों के साथ मिलकर अंकों में हेरफेर की।
DIG परिस देशमुख के अनुसार, जिन परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा सामने आया है, वे हैं—
सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा 2018
प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा 2018
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा 2018
इन तीनों परीक्षाओं में कुल 3212 पदों के लिए करीब 9.40 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षाएं वर्ष 2019 में आयोजित हुई थीं।
परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए OMR शीट की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का काम आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड (नई दिल्ली) को दिया गया था। जांच में सामने आया कि स्कैनिंग के बाद कंप्यूटर सिस्टम में डाटा से छेड़छाड़ की गई।
फोटोशॉप और अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों को बढ़ाया गया, जिससे अयोग्य अभ्यर्थी भी चयनित हो गए। बोर्ड द्वारा जब मूल OMR शीट्स की दोबारा स्कैनिंग कराई गई, तो परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी सामने आई।
SOG की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि कम से कम 38 अभ्यर्थियों के वास्तविक अंकों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाई गई। इस घोटाले में लाखों रुपये के लेनदेन की बात भी सामने आई है।
इस मामले में गिरफ्तार अभ्यर्थी पूनम माथुर के वास्तविक अंक 63 थे, लेकिन OMR शीट में हेरफेर कर उसके परीक्षा परिणाम में 182 अंक दर्शाए गए, जिससे उसका चयन हो गया।
एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि आउटसोर्स फर्म की गतिविधियां उत्तर प्रदेश से संचालित हो रही थीं। भर्ती परीक्षा के दौरान कैंडिडेट्स से कैश कलेक्शन किया गया था। इसी दौरान यूपी STF ने लखनऊ में कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा था। उनके पास से 60 लाख रुपये नकद और कई अभ्यर्थियों के नामों की सूची बरामद हुई थी।
गोमती नगर थाने में मामला दर्ज कर कैश और दस्तावेज जब्त किए गए थे। इसके बाद राजस्थान SOG ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए RSSB अधिकारियों तक पहुंच बनाई।
RSSB भर्ती घोटाला एक बार फिर यह साबित करता है कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाने वाले संगठित गिरोह सक्रिय हैं। SOG की कार्रवाई से जहां पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, वहीं अब जांच के बाद और भी नाम सामने आने की संभावना है। यह मामला न केवल चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ हुए अन्याय को भी उजागर करता है।
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