सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या के बहुचर्चित मामले में करीब 9 साल बाद बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। सीकर की एससी-एसटी कोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई समेत 11 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब 21 जनवरी को दोषियों को सजा सुनाएगी।
यह मामला 23 अगस्त 2017 का है, जब जुराठड़ा गांव के पूर्व सरपंच सरदार राव की दिनदहाड़े गोलियों से हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया था कि यह हत्या चुनावी रंजिश और सुपारी के चलते की गई थी।
अदालत ने लॉरेंस विश्नोई, हरदेवाराम, भानु प्रताप, कुलदीप, सुनील, मुकेश, यतेंद्र, ओम प्रकाश, हरविंद्र उर्फ मोनू, अरुण और नरेंद्र को हत्या का दोषी माना है। मामले में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 को दोषी करार दिया गया।
सरदार राव वर्ष 2010 से 2014 तक जुराठड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच रहे थे। वर्ष 2015 में चुनाव हारने के बाद 2017 में होने वाले उपचुनाव में उन्हें फिर से मजबूत दावेदार माना जा रहा था। इसी दौरान उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी हरदेवाराम को हार का डर सता रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि हरदेवाराम ने अजमेर जेल में बंद आनंदपाल गैंग के सदस्य सुभाष मूंड उर्फ सुभाष बराल से संपर्क कर सरदार राव की हत्या की सुपारी दी थी। बराल ने आगे गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई से मदद मांगी और शूटर्स उपलब्ध कराए गए।
23 अगस्त 2017 को दोपहर करीब 12:40 बजे सरदार राव पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना दुकान पर बैठे थे। तभी एक स्विफ्ट डिजायर कार वहां रुकी, जिसमें सवार बदमाशों ने दुकान में घुसकर बेहद नजदीक से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। महज 10 सेकंड में वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए।
घटना के वक्त दुकान में कई लोग मौजूद थे, जिन्होंने पूरी वारदात देखी। बाद में सरदार राव के पिता हणमंत प्रसाद ने रानोली थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच के दौरान सामने आया कि हत्या में लॉरेंस विश्नोई गैंग, संपत नेहरा और सुभाष बराल की अहम भूमिका थी। पुलिस ने लॉरेंस विश्नोई समेत 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार लॉरेंस विश्नोई का अपराध की दुनिया में प्रवेश चंडीगढ़ में छात्र राजनीति के दौरान हुआ। 2008 में एक विवाद के बाद उस पर पहला केस दर्ज हुआ और इसके बाद वह धीरे-धीरे देश के कुख्यात गैंगस्टरों में शामिल हो गया।
सीकर के पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में 9 साल बाद आया यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद है, बल्कि संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर कड़ा संदेश भी है। अब सभी की नजरें 21 जनवरी पर टिकी हैं, जब अदालत दोषियों को सजा सुनाएगी।
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