राजस्थान: के ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन बांदीकुई जंक्शन पर मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने शहरवासियों को गौरव और उत्साह से भर दिया। 150 साल पुराने रेलवे इतिहास की झलक अब फिर से जीवंत होने जा रही है। नैरोगेज लाइन का 11 टन वजनी भाप का इंजन 2600 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से लंबा सफर तय कर बांदीकुई पहुंचा है। इसे जंक्शन के प्रथम प्रवेशद्वार के बाहर प्रदर्शनी के रूप में स्थापित किया जाएगा।
यह ऐतिहासिक इंजन दक्षिण भारत के शहर तिरुचिरापल्ली से ट्रक के जरिए बांदीकुई लाया गया। लगभग एक सप्ताह पहले इसे विशेष सावधानियों के साथ रवाना किया गया था। मंगलवार को जैसे ही यह इंजन बांदीकुई पहुंचा, उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टेशन परिसर में एकत्रित हो गए।
रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी में क्रेन की सहायता से इंजन को ट्रक से उतारा गया और स्टेशन के प्रथम प्रवेशद्वार के बाहर तैयार किए गए प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया गया।
रेलवे सूत्रों के अनुसार इस भाप के इंजन का वजन करीब 11 टन है। इसे तैयार करवाने और संरक्षित रूप देने में लगभग 55 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। यह इंजन अंग्रेजों के जमाने में देश में शुरुआती दौर में ट्रेनों को खींचने वाले इंजनों की श्रेणी में आता है।
इंजन को विशेष रूप से Golden Rock Workshop में तैयार किया गया। इस वर्कशॉप को भारतीय रेलवे की विरासत संरक्षित करने के लिए जाना जाता है। यहां इंजन की मरम्मत, पेंटिंग और संरचनात्मक मजबूती का कार्य किया गया, ताकि इसे लंबे समय तक प्रदर्शनी के रूप में सुरक्षित रखा जा सके।
बांदीकुई का रेलवे से लगभग 150 साल पुराना संबंध रहा है। यहां वर्षों तक यात्री ट्रेनों का संचालन भाप के इंजनों से होता रहा। इसी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से विधायक भागचंद टांकड़ा ने हाल ही में रेलमंत्री से बांदीकुई जंक्शन पर भाप का इंजन प्रदर्शनी के लिए रखने की मांग की थी।
रेलवे ने लगभग एक माह पहले इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद इंजन को तैयार कर यहां भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
रेलवे प्रशासन ने इंजन को संग्रहालय स्वरूप में प्रदर्शित करने के लिए स्टेशन के प्रथम प्रवेशद्वार के बाहर विशेष प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इंजन को मजबूत बेल्ट से सुरक्षित बांधा जाएगा ताकि किसी प्रकार की क्षति या असंतुलन की संभावना न रहे।
इसके चारों ओर लॉन विकसित कर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। रात के समय आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था भी की जा सकती है, जिससे यह इंजन शहर का नया लैंडमार्क बन सके।
इंजन की स्थापना के दौरान स्टेशन अधीक्षक मनोज बैरवा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर हरिमन मीणा और सीएमआई शिव कुमार सहित कई रेलवे अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया को सुरक्षा मानकों के तहत पूरा किया गया।
स्थानीय नागरिकों और रेल प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया। लोगों का कहना है कि यह कदम न केवल शहर की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को रेलवे के गौरवशाली इतिहास से भी परिचित कराएगा।
बांदीकुई जंक्शन ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्टेशन रहा है। यहां से दिल्ली, जयपुर और आगरा जैसे प्रमुख मार्गों पर रेल संपर्क रहा है। भाप का इंजन प्रदर्शनी के रूप में स्थापित होने से स्टेशन की ऐतिहासिक छवि और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विरासत प्रोजेक्ट स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र, इतिहास प्रेमी और पर्यटक इस इंजन को देखने पहुंचेंगे, जिससे शहर की पहचान एक हेरिटेज डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो सकती है।
इंजन के पहुंचते ही लोगों ने मोबाइल कैमरों में तस्वीरें और वीडियो कैद किए। बुजुर्गों ने अपने पुराने दिनों की यादें ताजा कीं, जब भाप के इंजनों की सीटी और धुएं से स्टेशन गूंजता था। कई लोगों ने इसे बांदीकुई के गौरव की वापसी बताया।
नैरोगेज भाप का इंजन बांदीकुई जंक्शन पर स्थापित होना केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि शहर के 150 साल पुराने रेलवे इतिहास का पुनर्जीवन है। 2600 किलोमीटर दूर से आया यह 11 टन वजनी इंजन आने वाले समय में शहर का नया आकर्षण बनेगा। यह पहल न केवल विरासत संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि नई पीढ़ी को अतीत से जोड़ने का माध्यम भी है।
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