राजस्थान: के दौसा जिला के मानपुर कस्बे में एक ऐसी चोरी की वारदात सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को चौंका दिया है। एक ज्वेलर के घर से लाखों रुपए की चांदी की पायजेब रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। हैरानी की बात यह रही कि यह चोरी किसी ताले को तोड़कर या दीवार फांदकर नहीं की गई, बल्कि व्यापारी के नाबालिग बेटे को बहला-फुसलाकर अंजाम दी गई।
करीब 10 से 12 किलो चांदी की छोटी-बड़ी पायजेब, जिनकी बाजार कीमत लाखों में बताई जा रही है, कई बार में घर से बाहर ले जाई गईं। जब पिता को इस साजिश का पता चला, तो उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बेटे के जरिए ही जाल बिछाया और एक आरोपी को रंगे हाथों पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पीड़ित ज्वेलर अनिल सोनी ने बताया कि वह लंबे समय से सोने-चांदी के आभूषण बनाने का काम करते हैं। उनके पास अलवर निवासी अपने जीजा पंकज का विशेष ऑर्डर था। इस ऑर्डर के तहत उन्होंने 10-12 किलो चांदी की पायजेब तैयार की थी।
चूंकि उस समय बाजार में चांदी के भाव काफी अधिक चल रहे थे और ग्राहकी भी कम थी, इसलिए पायजेब की डिलीवरी टाल दी गई। सुरक्षा के लिहाज से पायजेब को घर के भीतर एक रैक में सुरक्षित रखा गया था।
अनिल सोनी के अनुसार, उन्हें कभी अंदेशा भी नहीं था कि घर के भीतर से ही इतनी बड़ी चोरी हो जाएगी।
14 जनवरी को जब उन्होंने रैक की जांच की तो वहां एक भी पायजेब नहीं मिली। पहले तो उन्हें लगा कि शायद सामान कहीं और रखा हो, लेकिन पूरे घर में तलाश के बाद भी जब कुछ नहीं मिला तो चिंता बढ़ गई।
इसके बाद उन्होंने अपने नाबालिग बेटे से पूछताछ की। शुरुआत में बेटा घबराया हुआ था, लेकिन जब उसे भरोसा दिलाया गया तो उसने जो बताया, उससे पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बेटे ने बताया कि सिकंदरा के डाबर निवासी कैलाश सैनी और विनोद सैनी नामक दो युवक उससे दोस्ती कर चुके थे। वे उसे छोटे-मोटे खर्च के लिए पैसे देते थे और कभी-कभी खाने-पीने का लालच भी देते थे।
इसी भरोसे और लालच के सहारे आरोपियों ने बच्चे को यह समझाया कि घर में रखी पायजेब में से थोड़ा-थोड़ा सामान निकालकर उन्हें दे दे। शुरुआत में बच्चे को अंदाजा नहीं था कि वह कितनी बड़ी गलती कर रहा है।
बताया जा रहा है कि कई बार में करीब 10 से 12 किलो चांदी की पायजेब आरोपियों को दे दी गई। यह सिलसिला कुछ समय तक चलता रहा और परिवार को भनक तक नहीं लगी।
जब पूरी बात सामने आई तो ज्वेलर ने तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन साथ ही उन्होंने खुद भी आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई।
उन्होंने बेटे से कहा कि वह आरोपियों से संपर्क बनाए रखे और उन्हें यह भरोसा दिलाए कि और भी सामान देने के लिए तैयार है।
योजना के मुताबिक आरोपियों को मानपुर कस्बे में बुर्ज के पास बुलाया गया। जैसे ही वे सामान लेने पहुंचे, पहले से तैयार ज्वेलर और उनके परिचितों ने घेराबंदी कर दी और एक आरोपी को पकड़ लिया।
उसे तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और दूसरे आरोपी की तलाश जारी है।
पीड़ित ने पुलिस से चोरी हुई पूरी चांदी की बरामदगी की मांग की है। उनका कहना है कि यह ऑर्डर पर तैयार किया गया माल था और यदि समय पर वापस नहीं मिला तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
चूंकि 10-12 किलो चांदी की कीमत बाजार दर के हिसाब से लाखों रुपए में आंकी जा रही है, इसलिए यह मामला सामान्य चोरी से कहीं अधिक गंभीर है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट होगा कि चांदी कहां बेची गई या किसे सौंपी गई। बरामदगी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
यह घटना केवल एक चोरी का मामला नहीं, बल्कि अपराधियों की नई रणनीति को भी उजागर करती है। अक्सर चोर घरों में घुसने के लिए नई-नई तरकीबें अपनाते हैं, लेकिन यहां सीधे परिवार के मासूम सदस्य को निशाना बनाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को पैसों या उपहार का लालच देकर घर की जानकारी हासिल करना या कीमती सामान निकलवाना अब एक बढ़ती प्रवृत्ति बनती जा रही है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को इस तरह की चालों से सावधान करें और घर में रखे कीमती सामान की जानकारी सीमित रखें।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी ने बताया कि यदि चोरी की गई चांदी को बाजार में बेचा गया है तो संबंधित दुकानदारों और दलालों से भी पूछताछ की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के जरिए भी मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
मानपुर कस्बे में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इस बात से हैरान हैं कि इतनी बड़ी चोरी घर के अंदर से और वह भी बच्चे के जरिए हो सकती है।
स्थानीय व्यापारियों ने भी इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कई ज्वेलर्स अब अपने घर और दुकान में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने पर विचार कर रहे हैं।
यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से पैसे या उपहार लेना खतरनाक हो सकता है।
साथ ही अभिभावकों को बच्चों के मित्र मंडली और उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
ज्वेलर अनिल सोनी ने भी कहा कि यदि समय रहते उन्हें सच्चाई का पता नहीं चलता, तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।
दौसा के मानपुर कस्बे में हुई यह चांदी की पायजेब चोरी न केवल आर्थिक नुकसान का मामला है, बल्कि अपराधियों की बदलती रणनीति का भी उदाहरण है। मासूम बच्चे को बहला-फुसलाकर 10-12 किलो चांदी ले जाना दर्शाता है कि अपराधी किस हद तक जा सकते हैं।
हालांकि पीड़ित की सूझबूझ से एक आरोपी पकड़ा गया है, लेकिन असली चुनौती चोरी हुए माल की पूरी बरामदगी और दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी है। यह घटना अभिभावकों के लिए भी चेतावनी है कि बच्चों को सतर्क और जागरूक बनाना आज के समय की जरूरत है।
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