Download App Now Register Now

जब कोर्टरूम बना रंगों का मंच: दौसा न्यायालय में न्यायाधीशों और वकीलों ने खेली फूलों की होली, गीतों पर लगे ठुमके

राजस्थान: के दौसा जिले में इस बार होली का रंग कुछ खास अंदाज में नजर आया। जहां आमतौर पर न्यायालय परिसर गंभीर बहसों, कानूनी दलीलों और फैसलों का साक्षी बनता है, वहीं शुक्रवार को वही परिसर रंगों, फूलों और उल्लास से सराबोर दिखाई दिया। Dausa District Court परिसर में अभिभाषक संघ की ओर से आयोजित होली स्नेह मिलन समारोह ने पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया।

न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे पर गुलाल के बजाय पुष्प वर्षा कर ‘फूलों की होली’ खेली। कार्यक्रम में सौहार्द, भाईचारे और आपसी सद्भाव का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न्यायालय की औपचारिक छवि को कुछ समय के लिए उत्सव की रंगीन चादर से ढंक दिया।


फूलों की खुशबू से महका न्यायालय परिसर

सुबह से ही न्यायालय परिसर में अलग सी हलचल थी। रंग-बिरंगे फूलों की टोकरी, सजे हुए मंच और हल्के संगीत की धुनें माहौल को उत्सवी बना रही थीं। जैसे ही कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने एक-दूसरे पर गुलाब, गेंदा और अन्य पुष्पों की वर्षा शुरू कर दी।

पारंपरिक होली के रंगों के बजाय फूलों से होली खेलने का निर्णय पर्यावरण संरक्षण और गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। इससे न केवल परिसर स्वच्छ रहा, बल्कि सभी ने सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण तरीके से त्योहार का आनंद लिया।


न्यायिक अधिकारियों ने दिया भाईचारे का संदेश

समारोह में जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का दायित्व समाज में संतुलन और न्याय स्थापित करना है, और ऐसे आयोजनों से आपसी संवाद और सहयोग की भावना मजबूत होती है।

उन्होंने सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि त्योहार हमें पुराने मतभेद भुलाकर नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है।


अभिभाषक संघ की पहल: परंपरा और आधुनिकता का संगम

कार्यक्रम का आयोजन जिला अभिभाषक संघ द्वारा किया गया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुंज बिहारी शर्मा ने कहा कि होली रंगों, प्रेम और भाईचारे का उत्सव है। इसका उद्देश्य सभी को एक साथ लाकर संबंधों को सुदृढ़ करना है।

उन्होंने बताया कि हर वर्ष होली के अवसर पर स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया जाता है, लेकिन इस बार फूलों की होली का विशेष आयोजन कर इसे अलग स्वरूप दिया गया। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।


गीत-संगीत और ठुमकों ने बढ़ाया उत्साह

होली के पारंपरिक गीतों की धुन पर न्यायालय परिसर गूंज उठा। “रंग बरसे” और अन्य लोकप्रिय फाग गीतों पर अधिवक्ताओं और अधिकारियों ने जमकर ठुमके लगाए। कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी मंच पर आकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिससे माहौल और भी जीवंत हो गया।

यह दृश्य उन लोगों के लिए विशेष था, जो न्यायालय को केवल गंभीर वातावरण से जोड़कर देखते हैं। यहां हंसी, मुस्कान और उल्लास ने साबित कर दिया कि कानून के रखवाले भी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहते हैं।


गरिमा और अनुशासन के साथ उत्सव

हालांकि माहौल पूरी तरह उत्सवमय था, लेकिन कार्यक्रम में अनुशासन और गरिमा का पूरा ध्यान रखा गया। किसी भी प्रकार के केमिकल रंग या पानी का प्रयोग नहीं किया गया। केवल पुष्पों और हल्के गुलाल का उपयोग कर कार्यक्रम को सादगीपूर्ण और सुरक्षित रखा गया।

कार्यक्रम में एडीजे रविकांत सोनी, एडीजे एसटी/एससी कोर्ट बृजेश शर्मा सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला अभिभाषक संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।


सामाजिक संदेश: मतभेद मिटाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा

होली का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, आपसी मतभेदों को भुलाने और नई शुरुआत का प्रतीक है। दौसा कोर्ट में आयोजित यह स्नेह मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं था, बल्कि न्यायिक परिवार के भीतर सामंजस्य और सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी बना।

कई अधिवक्ताओं ने कहा कि साल भर व्यस्त रहने के कारण सभी को एक साथ बैठने और अनौपचारिक बातचीत का अवसर कम मिलता है। ऐसे आयोजनों से आपसी समझ और तालमेल बेहतर होता है, जो पेशेवर जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।


न्यायपालिका की मानवीय छवि

इस आयोजन ने न्यायपालिका की मानवीय और सामाजिक छवि को भी उजागर किया। जहां एक ओर न्यायालय सख्त नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करता है, वहीं दूसरी ओर समाज और संस्कृति से उसका जुड़ाव भी उतना ही गहरा है।

फूलों की होली के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि न्याय के साथ-साथ संवेदनशीलता और सौहार्द भी उतना ही आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से होली की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयां बांटी गईं।


सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ समारोह

करीब दो घंटे तक चले इस समारोह का समापन सामूहिक फोटो सेशन और पारंपरिक व्यंजनों के साथ हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।

अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि न्यायालय परिसर में हमेशा आपसी सम्मान और सहयोग की भावना बनी रहेगी।


निष्कर्ष:

दौसा जिला न्यायालय में आयोजित होली स्नेह मिलन समारोह ने यह साबित कर दिया कि न्यायपालिका केवल कानून का संरक्षक ही नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक धारा का भी हिस्सा है। फूलों की होली, गीत-संगीत और आपसी भाईचारे के इस आयोजन ने न्यायिक परिवार के बीच संबंधों को और मजबूत किया।

ऐसे आयोजन न केवल पेशेवर संबंधों को मधुर बनाते हैं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि न्याय और मानवीय संवेदनाएं साथ-साथ चल सकती हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

Related News

All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.

BREAKING NEWS
भजनलाल शर्मा का आया एक फोन और सारा काम हो गया... | मुकेश मिश्रा बने इंडियन मीडिया काउंसिल के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष, रतीराम गुर्जर को मिली प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी | उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग विवाद: TMC बोली BJP ने विपक्षी सांसदों को ₹15-20 करोड़ में खरीदा; भाजपा ने कहा – I.N.D.I.A. गठबंधन में फूट | लाल किले से 'नए भारत' का आगाज: पीएम मोदी देंगे 12वां ऐतिहासिक भाषण, 5000 खास मेहमान बनेंगे गवाह | PM मोदी बोले: पुणे जैसा पटना और मुंबई जैसा मोतिहारी बनेगा, पहली नौकरी पर सरकार देगी ₹15 हजार | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ, एनटीपीसी निवेश से ऊर्जा क्षेत्र को भी मिलेगी रफ्तार: अमित शाह | राजस्थान में सरकारी नौकरियों का सुनहरा मौका: 50 हजार कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, नई भर्तियों में 100% पद बढ़े | नीरव मोदी के भाई निहाल मोदी को अमेरिका में किया गया गिरफ्तार: PNB घोटाले से जुड़े सबूत मिटाने का आरोप, भारत ने की थी प्रत्यर्पण की अपील | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले - भारतीय प्रवासियों ने दुनिया को भारत की संस्कृति और मूल्यों से जोड़े रखा, पूर्वजों की कठिनाइयों ने उम्मीद को नहीं तोड़ा | CM रेखा गुप्ता के बंगले के रेनोवेशन पर बवाल: एसी-टीवी से भरा टेंडर, विपक्ष ने कहा 'मायामहल' |