राजस्थान: के Dausa जिले में गर्मी के मौसम को देखते हुए पक्षियों और निराश्रित पशुओं के संरक्षण के लिए प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत पूरे जिले में करीब 20 हजार परिंडे (पानी के बर्तन) लगाए जाएंगे, ताकि गर्मी में पक्षियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।
यह निर्णय जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित जिला पशु क्रूरता निवारण समिति की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरविन्द शर्मा ने की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले सप्ताह से पूरे जिले में बड़े स्तर पर परिंडे लगाने का अभियान शुरू किया जाए।
बैठक में एडीएम अरविन्द शर्मा ने कहा कि पक्षियों के संरक्षण के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके तहत अलग-अलग विभागों को परिंडे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से जिलेभर में लगभग 20 हजार परिंडे लगाए जाएं। साथ ही इन परिंडों में नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का मानना है कि गर्मी के मौसम में जल स्रोत कम होने के कारण पक्षियों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह अभियान पक्षियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि गर्मियों में केवल पक्षियों ही नहीं बल्कि निराश्रित पशुओं के लिए भी पानी की उचित व्यवस्था की जाएगी।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की पहचान की जाए जहां पशुओं के लिए पानी की टंकियां या अन्य व्यवस्थाएं की जा सकें।
इससे गर्मी के मौसम में पशुओं को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
बैठक के दौरान एडीएम ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
उन्होंने National Highways Authority of India, परिवहन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि सड़क किनारे घूमने वाले निराश्रित गोवंश पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएं।
रिफ्लेक्टर लगाने से रात के समय वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशु दूर से दिखाई देंगे और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
प्रशासन का कहना है कि इससे न केवल पशुओं की जान बचाई जा सकेगी बल्कि सड़क हादसों को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।
बैठक में एडीएम अरविन्द शर्मा ने जिले में पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता नहीं होने पर असंतोष भी जताया।
उन्होंने बताया कि कई बार दुर्घटनाग्रस्त या बीमार गोवंश को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय ले जाने में दिक्कतें आती हैं। साथ ही पशु चिकित्सालय की पर्ची होने के बावजूद टोल नाकों पर छूट नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
एडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से घायल पशुओं को तुरंत पशु अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज कराया जाए।
इलाज के बाद इन पशुओं को गौशालाओं में शिफ्ट किया जाएगा ताकि उनका उचित देखभाल हो सके।
इसके अलावा निराश्रित गोवंश को Nandishala Beed, Dausa में आश्रय देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
बैठक में निराश्रित कुत्तों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
नगर परिषद को निर्देश दिए गए कि शहर में निराश्रित कुत्तों के लिए रेबीज टीकाकरण अभियान शुरू किया जाए।
इसके साथ ही घायल और बीमार पशुओं का उपचार कराकर उन्हें गौशालाओं या नंदीशालाओं में भेजने के निर्देश भी दिए गए।
इस बैठक में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रहलाद मीणा, उप निदेशक राधेश्याम मीणा, परिवहन विभाग के अधिकारी संदीप भारद्वाज सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
इसके अलावा जिला पशु क्रूरता निवारण समिति के सदस्य अवधेश कुमार अवस्थी और गौसेवक सुशील शर्मा भी बैठक में शामिल हुए।
दौसा प्रशासन द्वारा शुरू किया जा रहा यह अभियान पक्षियों और निराश्रित पशुओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गर्मी के मौसम में 20 हजार परिंडे लगाने और पशुओं के लिए पानी तथा चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने से पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
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