वाराणसी: काशी में रविवार को कांग्रेस और उसके छात्र संगठन NSUI के प्रदर्शन के दौरान हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के घेराव की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग किया। इस दौरान NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी को धक्का देकर गिरा दिया गया, जबकि कई कार्यकर्ताओं को सड़क पर घसीटते हुए पुलिस वाहनों में भरकर ले जाया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल खुद सड़क पर उतर आए और हालात का जायजा लिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि जबरदस्ती करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाए।
दरअसल, ‘वीबी जी राम जी’ बिल के विरोध में कांग्रेस और NSUI ने अलग-अलग प्रदर्शन का ऐलान किया था। NSUI ने प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के घेराव की घोषणा की थी। इसके तहत कार्यकर्ताओं को बीएचयू के सिंह द्वार पर जुटने के लिए कहा गया था, जहां से करीब तीन किलोमीटर दूर प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय तक मार्च की योजना थी।
दोपहर करीब दो बजे तक 50 से ज्यादा कांग्रेसी कार्यकर्ता सिंह द्वार पर जमा हो गए। नारेबाजी करते हुए जैसे ही उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, झड़प के दौरान पुलिसकर्मियों ने NSUI अध्यक्ष वरुण चौधरी का कंधा पकड़कर धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। वह खुद को बचाने के लिए भागे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी हाथ-पैर पकड़कर सड़क पर घसीटा गया।
पुलिस ने 10 से अधिक गाड़ियों में 100 से ज्यादा कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं को भरकर थाने ले जाया।
हालात बिगड़ते देख पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने साफ कहा कि बिना अनुमति के प्रदर्शन और जबरदस्ती किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च किया।
बीएचयू सिंह द्वार और प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास तीन स्तर की बैरिकेडिंग की गई है। ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के बाहर तीन थानों की फोर्स और आरपीएफ को तैनात किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत मार्च निकालने वाले थे। सुबह उनके आवास के बाहर ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। इसके बावजूद वह करीब 50 कार्यकर्ताओं के साथ निकले, लेकिन टाउनहॉल चौराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
इसके बाद अजय राय गांधी प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए और उपवास शुरू कर दिया।
अजय राय ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि संविधान से मिला काम का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-योगी सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है, ताकि गांवों में रोजगार खत्म हो और पलायन बढ़े।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का शांतिपूर्ण और गांधीवादी आंदोलन भी सरकार को असहज कर रहा है, इसलिए पुलिस के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला बताया।
डीआईजी स्तर के अधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता बिना अनुमति के प्रदर्शन कर रहे थे। जब उन्हें रोका गया, तो उन्होंने जबरदस्ती बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
काशी में कांग्रेस और NSUI का यह प्रदर्शन एक बार फिर सियासी टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहा है, तो वहीं पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी थी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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