यह विरोध केवल अमृतसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब के 20 जिलों—अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोज़पुर, मोगा, लुधियाना, बरनाला, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला, मोहाली, रोपड़, फतेहगढ़ साहिब और नवांशहर—में एक साथ आयोजित किया गया।
अमृतसर में मोर्चा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लोहड़ी की आग में जन-विरोधी कानूनों की प्रतियां जलाकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ये कानून किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता के हितों के खिलाफ हैं और सीधे-सीधे कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं।
कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों किसान, मजदूर, महिलाएं, कर्मचारी, छात्र, शहरी नागरिक और छोटे व्यापारी इन विरोध कार्यक्रमों में शामिल हुए, जिससे यह साफ हो गया कि जनता के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के वरिष्ठ नेता सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विश्व व्यापार संगठन (WTO), विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे संस्थानों के निर्देशों पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा—
“इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दबाव में ऐसी नीतियां बनाई जा रही हैं, जिनका सीधा फायदा कॉर्पोरेट घरानों को और नुकसान आम जनता को हो रहा है। इन्हीं नीतियों के चलते किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।”
मोर्चे ने केंद्र सरकार पर देश के संघीय ढांचे पर हमला करने का भी गंभीर आरोप लगाया। संगठन का कहना है कि बिजली, बीज, बाजार, पानी, अनुसंधान, शिक्षा और कृषि जैसे विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन केंद्र सरकार असंवैधानिक तरीके से कानून बनाकर राज्यों के अधिकार छीन रही है।
मोर्चे ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार इन कानूनों का विरोध करने के बजाय केंद्र के साथ मिलकर कॉर्पोरेट-परस्त नीतियों को लागू कर रही है।
किसान मजदूर मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल किसानों और मजदूरों तक सीमित नहीं है।
ऑनलाइन व्यापार, बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों और शॉपिंग मॉल संस्कृति के कारण छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का रोजगार तेजी से खत्म हो रहा है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि—
पंजाब में ‘राज्य प्रायोजित नशा’ चरम पर है
बेरोजगार युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेला जा रहा है
कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है
इन हालातों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
मोर्चे ने भविष्य के संघर्षों की रूपरेखा भी घोषित की—
18 जनवरी: मजीठा रैली, पंजाब के मुख्यमंत्री से सीधे सवाल
21–22 जनवरी: स्मार्ट मीटर उतारकर नजदीकी बिजली दफ्तरों में जमा
5 फरवरी: पंजाब के विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव
मोर्चे ने पंजाब की जनता से इन सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
इस आंदोलन में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के साथ-साथ
बीकेयू क्रांतिकारी, बीकेयू दोआबा, बीकेयू आज़ाद, बीकेयू बहिराम के, किसान मजदूर हितकारी सभा, बीकेयू भनेड़ी, बीकेएमयू, पीआरटीसी, पनबस, पंजाब रोडवेज सहित कई भाईचारा संगठनों ने समर्थन दिया।
अमृतसर से शुरू हुआ यह लोहड़ी विरोध प्रदर्शन स्पष्ट संकेत देता है कि पंजाब में जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और युवा—सभी खुद को इस संघर्ष का हिस्सा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में घोषित कार्यक्रम यह तय करेंगे कि यह आंदोलन कितनी बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बनकर उभरता है।
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