सबसे ज्यादा नजरें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर टिकी हुई हैं, जहां 227 वार्डों में करीब 1700 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। एशिया की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाने वाली BMC का चुनाव इस बार केवल स्थानीय सत्ता का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन गया है।
चुनाव प्रचार खत्म होने से एक दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। शिंदे ने कहा कि—
“मराठी मानुष की जो दुर्दशा आज देखने को मिल रही है, उसके लिए उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं। पिछले 25 सालों तक BMC पर उनकी पार्टी का शासन रहा, तब उन्होंने आखिर किया क्या?”
गौरतलब है कि 1997 से 2022 तक अविभाजित शिवसेना का BMC पर दबदबा रहा, जिसमें लंबे समय तक भाजपा उसकी सहयोगी रही।
इस बार चुनावी राजनीति में मराठी अस्मिता सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है।
करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नागरिक चुनावों में सक्रिय हुए हैं और दोनों ने मराठी गौरव को केंद्र में रखकर वोट मांगने की रणनीति अपनाई है।
मुंबई नगर निगम की 227 सीटों में से 32 सीटों पर त्रिकोणीय नहीं बल्कि सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। इन सीटों पर—
BJP-शिवसेना (शिंदे गुट)
शिवसेना (UBT)-MNS गठबंधन
के बीच सीधी भिड़ंत होगी।
यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि कांग्रेस-बहुजन वंचित अघाड़ी (VBA) गठबंधन ने इन 32 सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे वोटों का बंटवारा नहीं होगा और मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
कांग्रेस ने मुंबई में 143 उम्मीदवारों की घोषणा की
VBA ने 46 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया
वामपंथी दलों और राष्ट्रीय समाज पार्टी समेत अन्य सहयोगियों को 6 सीटें दी गईं
इस तरह कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 195 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जबकि 32 सीटें बिना तीसरे मोर्चे के रह गईं।
BMC चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता और भविष्य का फैसला है।
मुख्य कारण:
BMC का सालाना बजट करीब 74,000 करोड़ रुपए
यह बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों के बजट से भी बड़ा
1997 से 2017 तक अविभाजित शिवसेना का एकछत्र राज
अब शिवसेना के दो गुटों के बीच प्रतिष्ठा की जंग
यही वजह है कि भाजपा, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, कांग्रेस, शरद पवार और अजीत पवार—सभी अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव, खासकर BMC की लड़ाई, केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं है। यह चुनाव तय करेगा कि मुंबई की राजनीति किस दिशा में जाएगी और शिवसेना के दोनों गुटों में जनता किसे असली उत्तराधिकारी मानती है। 15 जनवरी की वोटिंग और 16 जनवरी का परिणाम महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।
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