राजस्थान: में प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल मच गई जब राज्य सरकार ने देर रात एक बड़ा आदेश जारी करते हुए 21 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। यह फेरबदल केवल औपचारिक ट्रांसफर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कानून-व्यवस्था, खुफिया तंत्र और विशेष इकाइयों में नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस सूची में कई वरिष्ठ अधिकारियों को प्रमोशन के साथ नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ अहम पदों पर अचानक बदलाव ने चर्चा को और तेज कर दिया है।
सबसे बड़ा बदलाव जोधपुर और जयपुर में देखने को मिला। एसओजी के आईजी शरत कविराज को जोधपुर का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वहीं जोधपुर के मौजूदा पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश को जयपुर में स्पेशल पुलिस कमिश्नर के पद पर भेजा गया है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जोधपुर और जयपुर दोनों ही प्रदेश के संवेदनशील और रणनीतिक शहर माने जाते हैं।
जयपुर में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। स्पेशल पुलिस कमिश्नर राहुल प्रकाश को जयपुर रेंज का आईजी नियुक्त किया गया है। यह पद कानून-व्यवस्था और जिलेवार पुलिस कार्यप्रणाली के लिए बेहद अहम माना जाता है। राहुल प्रकाश की नियुक्ति को प्रशासनिक अनुभव और रणनीतिक क्षमता के आधार पर अहम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने इस सूची में कई अधिकारियों को प्रमोशन के साथ नई जिम्मेदारी दी है। एडीजी क्राइम ब्रांच हवा सिंह घुमरिया को एडीजी मुख्यालय बनाया गया है। वहीं विपिन कुमार पांडे को एडीजी पुलिस भर्ती और पदोन्नति बोर्ड के पद पर भेजा गया है। मुख्यालय से एडीजी क्राइम ब्रांच, राजस्थान की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
प्रफुल्ल कुमार को आईजी इंटेलिजेंस से प्रमोट कर एडीजी इंटेलिजेंस बनाया गया है। जयपुर रेंज के आईजी राघवेंद्र सुवासा को प्रमोशन के बाद एडीजी ट्रेनिंग के पद पर तैनात किया गया है। इन बदलावों को पुलिस विभाग के पुनर्गठन और अनुभव के बेहतर उपयोग की दिशा में कदम माना जा रहा है।
जोधपुर रेंज की आईजी राजेश मीणा को आईजी होमगार्ड जयपुर के पद पर भेजा गया है। एस परिमल को आईजी कार्मिक पुलिस मुख्यालय से आईजी एसीबी के पद पर स्थानांतरित किया गया है। ओम प्रकाश-2 को पुलिस आर्म्ड बटालियन से आईजी बीकानेर रेंज बनाया गया है।
बीकानेर रेंज के आईजी हेमंत कुमार शर्मा को आईजी SCRB जयपुर भेजा गया है। वहीं अजय पाल लांबा को आईजी SCRB से आईजी एसओजी जयपुर की जिम्मेदारी दी गई है। एसओजी जैसे संवेदनशील विभाग में यह बदलाव विशेष महत्व रखता है।
इस आदेश का सबसे चर्चित पहलू यह रहा कि आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आईजी विकास कुमार से ATS की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। अब वे केवल आईजी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के पद पर कार्य करेंगे। उनके स्थान पर राजेश सिंह को आईजी एटीएस जयपुर बनाया गया है। राजेश सिंह पहले एसीबी में डीआईजी थर्ड के पद पर कार्यरत थे।
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि एटीएस राज्य की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विभाग है। सरकार के इस फैसले को सुरक्षा रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
सत्येंद्र सिंह को आईजी (सीआईडी सीबी) से आईजी जोधपुर रेंज नियुक्त किया गया है। हरेंद्र कुमार महावर को डीआईजी एसएसबी, जोधपुर से आईजी सीआईडी सीबी जयपुर बनाया गया है। प्रीति चंद्र को डीआईजी आर्म्ड बटालियन फर्स्ट जयपुर से आईजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशासन जयपुर नियुक्त किया गया है।
जेडीए जयपुर में तैनात डीआईजी राहुल कोटकी का तबादला आईजी कार्मिक पुलिस मुख्यालय के पद पर किया गया है। कालूराम रावत को डीआईजी पुलिस हाउसिंग से आईजी पुलिस सिविल राइट्स एंड एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग जयपुर नियुक्त किया गया है।
एक और बड़ा निर्णय यह रहा कि सत्येंद्र कुमार को आईजी SCRB जयपुर से राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसपोर्टेशन एंड इनोवेशन (RITI) जयपुर का सीईओ नियुक्त किया गया है। यह एक प्रशासनिक पद है, जो आमतौर पर आईएएस अधिकारियों को दिया जाता है। आईपीएस अधिकारी को इस पद पर नियुक्त करना सरकार के भरोसे और प्रशासनिक क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
राजस्थान जैसे बड़े राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हाल के समय में अपराध, साइबर क्राइम, नशा तस्करी और संगठित अपराध के मामलों में वृद्धि को देखते हुए यह फेरबदल रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया है, उनके अनुभव और कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रमोशन के बाद नई जिम्मेदारियां देना पुलिस विभाग में मनोबल बढ़ाने का भी संकेत है।
इन तबादलों के बाद पुलिस महकमे में नई ऊर्जा और रणनीति देखने को मिल सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई नियुक्तियां कानून-व्यवस्था और विशेष अभियानों पर क्या असर डालती हैं।
सरकार की ओर से जारी आदेश ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर व्यापक बदलाव की प्रक्रिया जारी है। आधी रात जारी हुई इस सूची ने एक बार फिर साबित किया कि प्रशासनिक फैसले कभी भी और किसी भी समय लिए जा सकते हैं।
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