जोधपुर: में प्राइवेट बस ऑपरेटरों की हड़ताल ने यातायात व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। प्रदेशभर में RTO के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच जोधपुर से बड़े शहरों और अन्य राज्यों के लिए जाने वाली 200 से अधिक बसें बंद हैं। आम दिनों में जहां इन बसों के काउंटर यात्रियों से भरे रहते थे, वहीं अब वे सूने नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, सरकारी रोडवेज बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है।
जोधपुर के कल्पतरू शॉपिंग सेंटर के पास बस ऑपरेटर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि परिवहन विभाग बिना वजह भारी-भरकम चालान काट रहा है और पुराने वाहनों पर नए नियम थोपे जा रहे हैं।
ऑल इंडिया टूरिस्ट बस ऑनर्स एसोसिएशन के सह-सचिव राजेंद्र परिहार ने बताया कि उनकी एसोसिएशन की रोजाना करीब 2 हजार बसें देश के विभिन्न शहरों के लिए संचालित होती हैं। इनमें पुणे, मुंबई, सूरत, बेंगलुरु, नई दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल हैं। जोधपुर से ही प्रतिदिन 200 से अधिक बसें रवाना होती हैं।
उन्होंने दावा किया कि इन बसों से रोजाना डेढ़ से दो लाख यात्री सफर करते हैं। हड़ताल के चलते हजारों यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर दक्षिण भारत और पश्चिम भारत की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी परेशानी हो रही है।
राजेंद्र परिहार का आरोप है कि सरकार 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक के चालान काट रही है। उन्होंने कहा, “सरकार अब नए नियमों के अनुसार बस चलाने का दबाव बना रही है। लेकिन जो बस 2010 में बनी है, उसे 2024-25 के नए मानकों के अनुसार कैसे बदला जाए?”
उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने पहले जो नॉर्म्स बताए थे, उन्हें ऑपरेटरों ने पूरा किया। बसों से कैरियर हटाए गए, सेफ्टी वॉल लगाए गए, हैमर लगाए गए। पांच साल पहले परिवहन विभाग ने ही फिटनेस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की थी। अब वही विभाग फिटनेस पर सवाल उठा रहा है।
एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष विष्णु शर्मा का कहना है कि प्राइवेट बसें यात्रियों को बेहतर सुविधा देती हैं। “हमारी छोटी से छोटी बस भी राज्य सरकार की बेहतर से बेहतर बस से बेहतर होती है। हम कम समय में, आरामदायक तरीके से यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाते हैं,” उन्होंने कहा।
ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी रोडवेज बसों में फायर सेफ्टी और अन्य आधुनिक सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। यही वजह है कि यात्री प्राइवेट बसों को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि हड़ताल के कारण अब यात्रियों को मजबूरी में रोडवेज का सहारा लेना पड़ रहा है।
जोधपुर में वर्तमान में 38 ट्रैवल एजेंसियों के मुख्य कार्यालय हैं और करीब 150 ब्रांच ऑफिस संचालित हो रहे हैं। हड़ताल के कारण इन एजेंसियों का कामकाज ठप हो गया है। काउंटर खाली पड़े हैं और कर्मचारियों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
राजेंद्र परिहार ने बताया कि हड़ताल का ऐलान तीन दिन पहले कर दिया गया था, इसलिए ज्यादा रिफंड नहीं करना पड़ा। अधिकांश यात्रियों ने अपनी टिकटें पहले ही कैंसिल करवा ली थीं।
बसें बंद होने से सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के यात्रियों पर पड़ा है। ट्रेन में तत्काल टिकट मिलना मुश्किल है और हवाई यात्रा महंगी है। ऐसे में प्राइवेट बसें ही एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प थीं।
जोधपुर से मुंबई, पुणे, सूरत, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में बड़ी संख्या में लोग रोजगार और व्यवसाय के सिलसिले में आते-जाते हैं। हड़ताल से इन यात्रियों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
ऑपरेटरों का कहना है कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। उनका उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान निकालना है। उनका कहना है कि पुराने वाहनों पर अचानक नए मानक लागू करना अव्यवहारिक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है। फिलहाल बस ऑपरेटर धरने पर डटे हुए हैं और RTO के खिलाफ नारेबाजी जारी है।
प्राइवेट बसों की हड़ताल ने यह भी दिखाया है कि प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था कितनी हद तक निजी ऑपरेटरों पर निर्भर है। यदि लंबे समय तक हड़ताल जारी रहती है, तो यात्रियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
जोधपुर में प्राइवेट बस ऑपरेटरों की हड़ताल ने परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। भारी चालानों और नए नियमों के विरोध में उतरे ऑपरेटर सरकार से संवाद की मांग कर रहे हैं। वहीं यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और रोडवेज बसों में भीड़ बढ़ गई है। अब नजरें सरकार और एसोसिएशन के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हैं, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके।
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