मिडिल ईस्ट: में जारी भीषण संघर्ष का आज तीसरा दिन है और हालात हर घंटे के साथ और खतरनाक होते जा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब क्षेत्रीय टकराव का रूप ले चुकी है। कुवैत में अमेरिका का एक फाइटर जेट क्रैश हो गया, जबकि दुबई में 16 घंटे के भीतर दूसरी बार धमाकों की खबर सामने आई है। इसी बीच लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी इस जंग में खुलकर शामिल हो गया है, जिससे इजराइल के उत्तरी मोर्चे पर तनाव चरम पर पहुंच गया है।
कुवैत में अमेरिकी वायुसेना का एक फाइटर जेट अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पायलट ने इमरजेंसी इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल कर समय रहते विमान से छलांग लगा दी और उसकी जान बच गई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जेट तकनीकी खराबी से गिरा या उसे किसी मिसाइल या ड्रोन ने निशाना बनाया।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई में एक बार फिर विस्फोटों की आवाज सुनी गई। इससे लगभग 16 घंटे पहले दुबई पोर्ट और बुर्ज खलीफा के आसपास धमाके हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने कई संदिग्ध ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
हालांकि, कुछ स्थानों पर धमाकों से हल्का नुकसान हुआ है। सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। प्रमुख इमारतों और पर्यटन स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इस जंग में अब लेबनान का उग्रवादी संगठन Hezbollah भी शामिल हो गया है। संगठन ने उत्तरी इजराइल के कई इलाकों में रॉकेट और बमबारी की जिम्मेदारी ली है। इसके बाद इजराइल ने लेबनान बॉर्डर से लगे करीब 50 गांव खाली करा लिए हैं।
लेबनान की राजधानी बेरूत और दहियाह इलाके को विशेष रूप से संवेदनशील घोषित किया गया है। दहियाह को हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। 2024 में यहां कई बड़े हमले हुए थे और नवंबर में सीजफायर के बाद भी छिटपुट संघर्ष जारी रहा।
इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह सीजफायर समझौते का उल्लंघन कर दोबारा हथियार जमा कर रहा है। वहीं, लेबनानी पक्ष का कहना है कि इजराइल लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने रातभर ईरान की राजधानी Tehran में हवाई हमले किए। इजराइली डिफेंस फोर्सेज ने फुटेज जारी कर दावा किया कि उन्होंने ईरान के रक्षा मुख्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया।
दूसरी ओर, ईरान ने भी इजराइल के प्रमुख शहरों पर मिसाइल हमले किए। Jerusalem और Tel Aviv में भारी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। मलबे में दबे वाहन और क्षतिग्रस्त इमारतें इस संघर्ष की भयावहता को दर्शाती हैं।
इजराइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog ने हमले के स्थलों का दौरा कर कहा कि देश इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। शुरुआती 30 घंटों में 2000 से अधिक बम गिराए गए।
इन हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 740 से अधिक घायल होने की खबर है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत और 45 घायल होने का दावा किया गया है। इस खबर ने वैश्विक स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है।
28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में उबाल ला दिया।
हिजबुल्लाह की एंट्री के बाद इजराइल ने एहतियातन उत्तरी सीमा के 50 गांव खाली करा लिए हैं। सेना ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है और बॉर्डर पर टैंक और आर्टिलरी तैनात कर दी गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चा पूरी तरह खुल गया तो यह जंग बहु-देशीय संघर्ष में बदल सकती है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की है। वहीं, कुछ देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल सीजफायर की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है, जहां क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा होने की संभावना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। एयरस्पेस बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, खासकर ऊर्जा आयातक देशों पर।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। कुवैत में अमेरिकी जेट क्रैश, दुबई में धमाके और हिजबुल्लाह की एंट्री ने संकेत दे दिया है कि यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा।
अगले 24 से 48 घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह जंग और व्यापक रूप ले सकती है।
ईरान-इजराइल जंग अब तीसरे दिन और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट का गिरना, दुबई में धमाके और हिजबुल्लाह का खुला समर्थन इस संघर्ष को क्षेत्रीय युद्ध में बदलने का संकेत दे रहे हैं।
मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक संतुलन डगमगा रहा है और पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि क्या हालात काबू में आएंगे या यह टकराव और भयानक रूप लेगा।
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