गोंडा: जिले के इटियाथोक थाना क्षेत्र स्थित जय गुरुदेव नगर में आयोजित तीन दिवसीय सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन उस समय चर्चा का माहौल गर्म हो गया, जब बाबा उमाकांत जी महाराज ने राजस्थान को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान में हवा जहरीली हो सकती है और वहां बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।
सत्संग में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बाबा उमाकांत ने पर्यावरण, आध्यात्मिक साधना और सामाजिक सजगता पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और मनुष्य को आध्यात्मिक मार्ग अपनाकर स्वयं और समाज की रक्षा करनी होगी।
महाराज ने विशेष रूप से भारत के पश्चिमी प्रांत राजस्थान के लोगों को संबोधित करते हुए सलाह दी कि वहां जगह-जगह तीन-तीन दिन के साधना शिविर आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में ‘जयगुरुदेव’ नामध्वनि का अधिक से अधिक जाप कराया जाए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कदम केवल सत्संगियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवार, रिश्तेदारों, व्यापारिक सहयोगियों और पड़ोसियों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। उनका मानना है कि सामूहिक नाम-स्मरण से वातावरण शुद्ध होता है और संभावित संकटों का असर कम किया जा सकता है।
अपने प्रवचन में बाबा उमाकांत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोगों ने उनकी सलाह को गंभीरता से नहीं लिया, तो हालात अचानक बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम दिशा, विशेषकर दक्षिणी कोने से आने वाली जहरीली गैस के कारण हवा दूषित हो सकती है।
उन्होंने एक प्रतीकात्मक वर्णन करते हुए कहा कि यह गैस बादलों के रूप में दिखाई दे सकती है और चकत्तों की तरह फैलकर नीचे जहर बरसा सकती है। उनके इस कथन से सत्संग में मौजूद लोगों के बीच सन्नाटा छा गया।
महाराज ने यहां तक कहा, “बहुत मरेंगे। लाशों पर लाशों का नजारा होगा, सुनते तो जाओ संदेश हमारा।” उनके इस कथन ने उपस्थित लोगों को गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया।
अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने एक काल्पनिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश से दुश्मनी की स्थिति बनती है, तो कीटाणु बम जैसे खतरे भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे हमलों से कीड़े-मकोड़े फैल सकते हैं, जो लोगों को काटकर बीमारियां फैला सकते हैं।
हालांकि उन्होंने इसे संभावित खतरे के रूप में बताया, लेकिन इस बयान ने चर्चा और अटकलों को जन्म दे दिया है। सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बाबा उमाकांत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भय फैलाना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि नाम जाप, साधना और संयमित जीवन शैली ही हर संकट का समाधान है।
उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने, पर्यावरण की रक्षा करने और आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने की अपील की। सत्संग में शामिल श्रद्धालुओं ने उनके संदेश को गंभीरता से सुना और सामूहिक नाम-स्मरण में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन और प्रवचन का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
गोंडा के जय गुरुदेव नगर में आयोजित सत्संग के दौरान बाबा उमाकांत की भविष्यवाणी ने राजस्थान को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे आध्यात्मिक चेतावनी मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उन्होंने साधना, नाम जाप और सामूहिक जागरूकता को ही संभावित संकट से बचाव का मार्ग बताया है।
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