Patna: में गुरुवार को बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah अचानक पटना पहुंचे और मुख्यमंत्री Nitish Kumar से मुलाकात की। इस मुलाकात ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं। इसी बीच अमित शाह का पटना दौरा और मुख्यमंत्री से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार दोपहर पटना एयरपोर्ट पहुंचे। यहां उनका स्वागत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने किया।
डिप्टी सीएम Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha ने पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया। इसके अलावा भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी एयरपोर्ट पर मौजूद थे।
स्वागत के बाद अमित शाह सीधे भाजपा अध्यक्ष Nitin Naveen के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
नितिन नवीन के आवास पर हुई बैठक में कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh (ललन सिंह), केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Sanjay Saraogi, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और अन्य कई नेता शामिल थे।
बैठक में राज्यसभा चुनाव, बिहार की राजनीतिक स्थिति और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद अमित शाह भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अमित शाह का शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई।
इस मुलाकात को बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है।
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अमित शाह और नितिन नवीन एक साथ विधानसभा के लिए रवाना हुए।
बताया जा रहा है कि यहां एनडीए उम्मीदवार के तौर पर नामांकन प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता विधानसभा पहुंच चुके थे।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद जदयू कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली।
गुस्साए कार्यकर्ता जदयू कार्यालय पहुंच गए और कई नेताओं का विरोध करने लगे। इस दौरान जदयू एमएलसी संजय गांधी की गाड़ी को घेर लिया गया।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ नेता भाजपा से मिलकर पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
जदयू कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट दिया था।
उनका कहना है कि जनता ने 2025 से 2030 तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में जनादेश दिया था। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना जनता की भावनाओं के खिलाफ है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को कार्यकर्ताओं की बात सुननी ही पड़ेगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने भाजपा पर बड़ा आरोप लगाया है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में सत्ता परिवर्तन जनता की भावनाओं के खिलाफ हो रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में मशीन तंत्र का दुरुपयोग किया है और अब नीतीश कुमार को मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कौन अधिकारी, मंत्री या केंद्र का नेता है जिसने नीतीश कुमार को “हाईजैक” कर लिया है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की रणनीति सहयोगी दलों को खत्म करने की होती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि जनता दल यूनाइटेड खत्म हो जाए। तेजस्वी ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी वही मॉडल लागू किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति है।
इन घटनाओं के बीच नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar की राजनीति में एंट्री की चर्चा भी तेज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हालांकि इस बारे में अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कई नेताओं ने संकेत दिए हैं कि निशांत कुमार भविष्य में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
इस बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।
राजद ने अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।
तेजस्वी यादव ने इस मौके पर कहा कि भाजपा बिहार की राजनीति को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
अगर ऐसा होता है तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना भी बन सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
एनडीए के लिए यह समय बेहद अहम माना जा रहा है।
एक ओर राज्यसभा चुनाव हैं तो दूसरी ओर राज्य की राजनीति में नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज है।
अमित शाह का पटना दौरा भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार पर हमला कर रहा है।
राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस घटनाक्रम को जनता के सामने बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पटना में अमित शाह की मौजूदगी, नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और जदयू कार्यकर्ताओं का विरोध—इन सभी घटनाओं ने बिहार की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं और बिहार की राजनीति में कौन सा नया नेतृत्व सामने आता है।
फिलहाल इतना तय है कि बिहार की सियासत में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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