मनरेगा योजना: में बदलाव और नाम परिवर्तित किए जाने के विरोध में दौसा जिला मुख्यालय पर कांग्रेस पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया। सोमवार को कांग्रेस ने मनरेगा मजदूरों के साथ रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ के नेतृत्व में रैली नेहरू पार्क से शुरू होकर गांधी तिराहे पर सम्पन्न हुई। रैली में बड़ी संख्या में मजदूर, महिलाएं और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए।
रैली के दौरान दृश्य बेहद प्रतीकात्मक रहा। विधायक दीनदयाल बैरवा और पूर्व विधायक जीआर खटाना कंधे पर फावड़ा रखकर चलते नजर आए, वहीं कई महिलाएं सिर पर तगारी रखकर नारे लगाती रहीं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया।
विधायक दीनदयाल बैरवा ने कहा कि—
“मनरेगा तत्कालीन कांग्रेस सरकार की देन है, जिसने ग्रामीण गरीबों को 100 दिन की रोजगार गारंटी दी। भाजपा सरकार ने नियम बदलकर और नाम बदलकर इस योजना के साथ छल किया है। इससे गरीबों का जीवन और मुश्किल हो जाएगा।”
उन्होंने कहा कि मनरेगा से लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजी-रोटी मिलती है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों से यह योजना खतरे में है।
पूर्व विधायक जीआर खटाना ने कहा—
“मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि संविधान के तहत गरीबों का काम का अधिकार है। मोदी सरकार ने करोड़ों मजदूरों की जीवनरेखा छीनने का काम किया है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी, जब तक सरकार अपने फैसले वापस नहीं लेती।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ़ ने कहा कि—
“मनरेगा ग्रामीण रोजगार की रीढ़ है। मौजूदा नीतियों के चलते यह योजना कमजोर होती जा रही है। यदि केंद्र सरकार ने बदलाव वापस नहीं लिए, तो कांग्रेस आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाएगी।”
प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार से मनरेगा के मूल स्वरूप को बनाए रखने और किसी भी तरह के बदलाव को वापस लेने की मांग की गई।
दौसा में कांग्रेस का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि मनरेगा को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने वाला है। विधायक से लेकर मजदूर तक सड़कों पर उतर आए हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
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