राजस्थान: के सीकर जिले से निकली एक प्रेरक कहानी पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम Mann Ki Baat के 131वें एपिसोड में सीकर के ट्रांसप्लांट एथलीट रामदेव सिंह मील की अद्भुत संघर्षगाथा साझा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कहानी केवल बीमारी से लड़ने की नहीं, बल्कि मौत के दरवाजे से लौटकर तिरंगा फहराने की मिसाल है।
सीकर जिले के कंवरपुरा गांव के मूल निवासी रामदेव सिंह मील वर्तमान में सालासर में बिजली विभाग में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। साल 2012 में अचानक पेट की गंभीर समस्या के चलते उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं। यह परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। ऐसे कठिन समय में उनकी मां श्योकोरी देवी आगे आईं और अपनी एक किडनी दान कर बेटे को नया जीवन दिया।
लगभग एक साल के इलाज और रिकवरी के बाद रामदेव ने न केवल सामान्य जीवन में वापसी की, बल्कि खेल के मैदान में भी नया इतिहास रच दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अंगदान के बाद भी जीवन थमता नहीं, बल्कि नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
रामदेव सिंह दो बार मुंबई में आयोजित नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने दो गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद 2023 में दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए। हाल ही में पीजीआई चंडीगढ़ में आयोजित ट्रांसप्लांट गेम्स में भी उन्होंने दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित World Transplant Games में देखने को मिली। यहां भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रामदेव ने भाला फेंक में गोल्ड, लंबी कूद में सिल्वर और बॉल थ्रो व डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर तिरंगा लहराया। बीमारी से जूझने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करना किसी चमत्कार से कम नहीं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अंगदान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रामदेव की कहानी देश के हर नागरिक को प्रेरित करती है। अंगदान किसी एक व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को नया जीवन देता है।
रामदेव के पिता अमराराम मील किसान हैं और खेती-पशुपालन से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी एक बहन का निधन कोरोना काल में हो गया था। आज रामदेव अपनी बहन की तीन बेटियों की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनके खुद के दो बच्चे हैं—14 वर्षीय यशराज और 6 वर्षीय अनिशा। सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे खेल के प्रति अपने जुनून को जिंदा रखे हुए हैं।
हालांकि, रामदेव का कहना है कि ट्रांसप्लांट खिलाड़ियों को सरकार की ओर से पर्याप्त पहचान और आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता। ट्रांसप्लांट और दवाइयों का खर्च पहले ही बहुत अधिक होता है। इसके बावजूद वे अपने स्तर पर तैयारी करते हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार से सहयोग मिले तो वे और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
सालासर बिजली विभाग के एईएन जितेंद्र सिंह शेखावत ने भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में रामदेव का उल्लेख किया जाना पूरे विभाग के लिए गर्व की बात है। इससे कर्मचारियों में उत्साह और प्रेरणा का संचार हुआ है।
रामदेव सिंह मील की कहानी इस बात का प्रमाण है कि इच्छाशक्ति, परिवार का सहयोग और सकारात्मक सोच हो तो कोई भी मुश्किल मंजिल की राह नहीं रोक सकती।
सीकर के रामदेव सिंह मील ने यह सिद्ध कर दिया कि अंगदान केवल जीवन बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि नए सपनों को पंख देने का अवसर भी है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में उनकी कहानी साझा किए जाने से न केवल उन्हें सम्मान मिला है, बल्कि देशभर में अंगदान के प्रति नई जागरूकता भी पैदा हुई है।
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