बांदीकुई। बांदीकुई जंक्शन पर जल्द ही एक बार फिर इतिहास जीवंत होता नजर आएगा। करीब 33 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बांदीकुई जंक्शन पर स्टीम इंजन की झलक देखने को मिलेगी। रेलवे प्रशासन ने इसके लिए जीआरपी थाने के बाहर स्थान चिह्नित कर लिया है, जहां इस स्टीम इंजन को मॉडल के रूप में स्थापित किया जाएगा।
रेलवे सूत्रों के अनुसार जल्द ही वरिष्ठ रेलवे अधिकारी चिन्हित स्थान का निरीक्षण करेंगे, जिसके बाद आवश्यक स्ट्रक्चर तैयार कर स्टीम इंजन को यहां स्थापित किया जाएगा।
बांदीकुई जंक्शन का रेलवे से लगभग 150 साल पुराना गौरवशाली इतिहास जुड़ा हुआ है। यह स्टेशन उन प्रमुख जंक्शनों में शामिल रहा है, जहां स्टीम इंजन युग की शुरुआत हुई थी। वर्षों तक यहां स्टीम इंजन का संचालन होता रहा, लेकिन वर्ष 1993 में स्टीम इंजन लोको का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिसके बाद डीजल इंजनों ने उनकी जगह ले ली।
शहर के इस ऐतिहासिक गौरव को दोबारा जीवंत करने के लिए विधायक भागचंद टांकड़ा ने हाल ही में रेल मंत्री से मुलाकात कर बांदीकुई में एक पुराने स्टीम इंजन को मॉडल के रूप में स्थापित करने की मांग रखी थी।
विधायक की इस पहल पर रेल मंत्री के निर्देश के बाद रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अब बांदीकुई जंक्शन पर स्टीम इंजन स्थापित किया जाएगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह स्टीम इंजन दक्षिण रेलवे की गोल्डन रॉक जीओसी वर्कशॉप से लाया जाएगा। वहां इस इंजन को पहले ही तैयार किया जा चुका है। यह एक नैरो गेज लाइन का स्टीम इंजन होगा।
इसी प्रकार के स्टीम इंजन वर्तमान में दार्जिलिंग जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर टॉय ट्रेन संचालन में उपयोग किए जा रहे हैं, जो पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।
स्टीम इंजन के स्थापित होने के बाद यह बांदीकुई जंक्शन पर आने वाले यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही यह नई पीढ़ी को रेलवे के ऐतिहासिक सफर से रूबरू कराने का माध्यम भी बनेगा।
बांदीकुई जंक्शन पर स्टीम इंजन की वापसी न केवल रेलवे इतिहास को संजोने की पहल है, बल्कि यह शहर की पहचान और गौरव को भी नई पहचान देगी। 33 साल बाद स्टीम इंजन की मौजूदगी बांदीकुई को रेलवे विरासत के नक्शे पर फिर से खास स्थान दिलाएगी।
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