बिहार: की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा करते हुए कहा कि वह इस बार राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है और राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अपने पोस्ट में लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने की इच्छा जताई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग मिलेगा।
नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। कई कार्यकर्ता रोते हुए दिखाई दिए और उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार छोड़कर नहीं जा सकते।
कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रहे कुछ नेताओं का विरोध भी किया। बताया जा रहा है कि बीजेपी कोटे के मंत्री सुरेंद्र मेहता, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी और विधायक प्रेम मुखिया को कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन इतना तेज था कि कई नेताओं की गाड़ियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही बिहार के कई जिलों में भी विरोध शुरू हो गया। बेगूसराय, नालंदा समेत कई जगहों पर जेडीयू समर्थकों ने नाराजगी जताई। नीतीश कुमार के पैतृक गांव नालंदा के कल्याण विगहा में भी लोगों ने इसे साजिश बताया।
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि जनता ने 2025 से 2030 तक के लिए उन्हें मुख्यमंत्री चुना था, लेकिन कुछ राजनीतिक ताकतों ने उन्हें हटाने की साजिश रची है।
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता Tejashwi Yadav ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी ने महाराष्ट्र मॉडल को बिहार में लागू किया है और अपने सहयोगी दलों को कमजोर करने की रणनीति अपनाई है। उनका कहना है कि भाजपा ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar पर इतना दबाव बनाया कि उन्हें यह फैसला लेना पड़ा।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी के साथ गठबंधन बना रहता तो नीतीश कुमार को ऐसा दिन नहीं देखना पड़ता।
नीतीश कुमार के फैसले के बाद जेडीयू के अंदर भी असंतोष देखने को मिल रहा है। पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और कुछ नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालात को देखते हुए पार्टी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हालांकि जेडीयू के वरिष्ठ नेता Rajiv Ranjan Singh ने कहा कि मुख्यमंत्री जो भी फैसला लेंगे, पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उसे स्वीकार करना होगा।
इसी बीच मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कुछ नेताओं का मानना है कि उन्हें राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि पार्टी की ओर से इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है और राज्य में सत्ता संतुलन बदल सकता है।
मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की इच्छा ने बिहार की राजनीति में बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है। जहां एक तरफ उनके समर्थक इस फैसले से भावुक और नाराज दिखाई दे रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे भाजपा की रणनीति बता रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि इस फैसले का बिहार की सत्ता और राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
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