नई दिल्ली। राष्ट्रपति मुर्मू गणतंत्र दिवस संबोधन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण, शांति, विकास और लोकतंत्र के महत्व पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भारत की संवैधानिक परंपराओं, एकता और गौरव का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर आत्मचिंतन करने का अवसर है। उन्होंने याद दिलाया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस के साथ-साथ वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का गौरवशाली अवसर भी है, जो देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को और मजबूत करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू गणतंत्र दिवस संबोधन में महिला सशक्तिकरण को विशेष महत्व दिया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है, जो भारत की प्रगति का मजबूत आधार बन रही है।
उन्होंने बताया कि देश में 57 करोड़ जन-धन खातों में से 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं। इसके अलावा, 10 करोड़ से अधिक महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप देशभर में सक्रिय हैं, जो ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं।
राष्ट्रपति ने खेल जगत में बेटियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप और ब्लाइंड वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा है। यह उपलब्धियां न केवल खेल के क्षेत्र में, बल्कि समाज में बेटियों की बढ़ती भूमिका और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति कानून के माध्यम से देश की महिलाएं और अधिक सशक्त होंगी और नेतृत्व की भूमिका में आगे आएंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में विश्वास जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने कहा कि देश के विकास में हर वर्ग और हर क्षेत्र की अहम भूमिका है।
उन्होंने पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सराहना करते हुए कहा कि वे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए दिन-रात तत्पर रहते हैं। साथ ही डॉक्टर, नर्स, स्वास्थ्यकर्मी, इंजीनियर और किसान देश की प्रगति की रीढ़ हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि किसानों की मेहनत के कारण आज भारत के कृषि उत्पाद विदेशों तक पहुंच रहे हैं, जिससे देश की वैश्विक पहचान और मजबूत हो रही है।
राष्ट्रपति मुर्मू गणतंत्र दिवस संबोधन में वैश्विक शांति पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में हमेशा पूरी सृष्टि में शांति की कामना की जाती रही है। आज जब दुनिया के कई हिस्सों में अशांति और संघर्ष का माहौल है, ऐसे समय में भारत शांति और भाईचारे का संदेश पूरी दुनिया को दे रहा है।
उन्होंने कवि गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत भूमि पर जन्म लेना गर्व की बात है और यह जिम्मेदारी भी कि हम मानवता के भविष्य को सुरक्षित रखें।
राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारतीय सेनाओं ने आतंकवाद के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर देश की सुरक्षा को मजबूत किया।
थल सेना, वायु सेना और नौसेना की सामूहिक शक्ति के कारण देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। यह भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और रणनीतिक ताकत को दर्शाता है।
राष्ट्रपति ने 25 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए लोकतंत्र में मतदान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनीतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है।
महिलाओं की बढ़ती मतदान भागीदारी को उन्होंने लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत बताया और कहा कि यह देश के विकास में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
पर्यावरण संरक्षण को आज की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने पर्यावरण से जुड़े कई क्षेत्रों में विश्व का मार्गदर्शन किया है।
उन्होंने LIFE (Lifestyle for Environment) की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन शैली भारत की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही है। यह भावी पीढ़ियों के लिए धरती के संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प है।
राष्ट्रपति मुर्मू गणतंत्र दिवस संबोधन ने देश को एकता, शांति, महिला सशक्तिकरण और विकास का स्पष्ट संदेश दिया। बेटियों की उपलब्धियों से लेकर भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत बनने की दिशा तक, राष्ट्रपति का यह संबोधन देश के उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश करता है। 77वां गणतंत्र दिवस भारत की संवैधानिक शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और प्रगतिशील सोच का उत्सव बनकर देशभर में मनाया जाएगा।
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