जयपुर। राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शुक्रवार को एक दिलचस्प लेकिन असहज स्थिति बन गई, जब डिप्टी सीएम और परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा सवाल का जवाब देते हुए मूल प्रश्न से भटक गए। मामला भाजपा विधायक कल्पना देवी द्वारा लाडपुरा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा मापदंडों के उल्लंघन से जुड़े प्रश्न का था।
जैसे ही बैरवा जवाब देने के लिए खड़े हुए, उन्होंने मूल सवाल के बजाय संभावित सप्लीमेंट्री प्रश्न का जवाब पढ़ना शुरू कर दिया। इस पर विधायक कल्पना देवी ने तुरंत टोका—“यह तो मैंने अभी पूछा ही नहीं।”
स्थिति स्पष्ट होते ही अध्यक्ष ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मंत्री गलत जवाब पढ़ रहे हैं। स्पीकर की आपत्ति के बाद डिप्टी सीएम ने तुरंत अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगते हुए मूल प्रश्न का सही जवाब पढ़ना शुरू किया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि मंत्री को पहले से सप्लीमेंट्री सवाल का कैसे पता चल गया।
सदन में इसके बाद जल जीवन मिशन में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक राजेंद्र मीणा के सवाल के जवाब में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि मिशन में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व जलदाय मंत्री के खिलाफ कार्रवाई हुई है और तत्कालीन एसीएस स्तर के IAS अधिकारी के खिलाफ भी एसीबी में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने नाम सार्वजनिक करने की मांग की। स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते। इस दौरान सदन में कुछ देर तक नोकझोंक जारी रही।
ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों का मुद्दा भी सदन में जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक गोविंद प्रसाद के सवाल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि तबादला नीति प्रक्रियाधीन है और नीति बनने के बाद ही तबादलों पर विचार होगा।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर सवा दो साल में भी तबादला नीति नहीं बनाने का आरोप लगाया। इस पर दिलावर ने पलटवार करते हुए कहा कि 2018 में भाजपा शासन के दौरान 2200 से अधिक तबादले किए गए थे, जबकि कांग्रेस शासन में एक भी ग्रेड थर्ड शिक्षक का तबादला नहीं हुआ।
दिलावर ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेड थर्ड शिक्षकों के जिलों से बाहर तबादले का कोई नियमित प्रावधान नहीं है, हालांकि पूर्व में कटऑफ डेट के आधार पर राहत दी गई थी।
सदन में निजी विश्वविद्यालयों में कथित फर्जीवाड़े और फर्जी डिग्रियों के मामलों पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। सरकार ने कहा कि गड़बड़ियों के मामलों में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
इससे पहले गुरुवार को ‘राइट टू हेल्थ’ कानून के नियम लागू न होने के मुद्दे पर भी सदन में हंगामा हुआ था।
राजस्थान विधानसभा का यह सत्र राजनीतिक गर्मी और तीखे सवाल-जवाब से भरपूर रहा। डिप्टी सीएम की छोटी-सी चूक से शुरू हुई चर्चा जल जीवन मिशन में कथित घोटाले, IAS पर कार्रवाई और शिक्षकों की तबादला नीति जैसे बड़े मुद्दों तक पहुंच गई। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार तबादला नीति और जल जीवन मिशन की जांच को लेकर कितनी ठोस कार्रवाई करती है और विपक्ष किस रणनीति के साथ इन मुद्दों को आगे बढ़ाता है।
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