बसवा (दौसा): बसवा कस्बे में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी की दीवार अचानक ढह जाने से क्षेत्र में चिंता का माहौल है। रामपुर दरवाजे से आगे बावड़ी वाले हनुमान जी के पास स्थित यह बावड़ी अब अपनी पहचान खोने के कगार पर पहुंच गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह धरोहर लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है।
बसवा विकास समिति के अध्यक्ष गिर्राज सैनी ने बताया कि इस बावड़ी का पूर्व में Archaeological Survey of India (पुरातत्व विभाग) द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया था।
हालांकि मरम्मत के कुछ ही दिनों बाद बावड़ी की दीवारें फिर से गिर गईं। इससे जीर्णोद्धार की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बसवा क्षेत्र में कई प्राचीन बावड़ियां मौजूद हैं, जो कभी जल संरक्षण और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण मानी जाती थीं। लेकिन वर्तमान में अधिकांश बावड़ियां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इन ऐतिहासिक धरोहरों से वंचित रह जाएंगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जीर्णोद्धार के लिए आने वाले सरकारी फंड का सही उपयोग नहीं किया जाता। संबंधित अधिकारी और ठेकेदार काम में लापरवाही बरतते हैं, जिसका नतीजा कुछ ही समय में सामने आ जाता है।
इस मामले में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिल सका।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने बावड़ी की गुणवत्ता जांच कराने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए स्थायी योजना बनाने की अपील की गई है।
बसवा की यह प्राचीन बावड़ी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है। जीर्णोद्धार के बाद भी दीवार गिरना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
यदि प्रशासन और संबंधित विभाग समय रहते ठोस कदम नहीं उठाते, तो बसवा की ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे मिटती चली जाएगी।
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