दौसा: की पॉक्सो कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाले आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद बना, बल्कि समाज को भी यह संदेश देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों पर कानून पूरी सख्ती से लागू होगा।
मामला 8 दिसंबर 2023 का है। परिवादी ने महिला थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि वह अपने परिवार के साथ दौसा में एक शादी समारोह में शामिल होने आया था। इसी दौरान उसकी 5 वर्ष 5 महीने की मासूम बेटी के साथ गंभीर अपराध किया गया। घटना के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उसे तत्काल जयपुर रेफर किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अनिल कुमार को गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
संवेदनशील प्रकृति के इस प्रकरण में अदालत ने विशेष सतर्कता बरतते हुए पैरवी के लिए विशिष्ट लोक अभियोजक गोपाल लाल शर्मा को नियुक्त किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट में कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 57 महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए गए।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने आरोपी अनिल कुमार को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया। इसके साथ ही अन्य धाराओं में भी 2 साल का कठोर कारावास भुगतने के आदेश दिए गए हैं।
दौसा पॉक्सो कोर्ट का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर एक मजबूत संदेश है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि मासूमों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है। यह निर्णय पीड़ित परिवार के लिए न्याय की जीत और समाज के लिए चेतावनी है कि ऐसे अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
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