प्रयागराज। प्रयागराज में आयोजित माघ मेला के दौरान जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी सरस्वती महाराज, उनके शिष्यों और अनुयायियों के साथ हुए कथित अनादर की घटना को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना पर नायब क़ाज़ी सैयद असगर अली ने गहरा शोक और स्तब्धता व्यक्त की है।
नायब क़ाज़ी सैयद असगर अली ने कहा कि माघ मेला जैसे पवित्र और धार्मिक आयोजन में जगतगुरु, शंकराचार्य और संत-महंतों के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और शर्मनाक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी घटनाओं का किसी भी परिस्थिति में बचाव नहीं किया जा सकता।
उन्होंने आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वैदिक बटुक ब्राह्मण की शिखा पकड़कर खींचने, मारपीट करने और अपमानित करने जैसी घटनाएँ सच हैं, तो यह अत्यंत पीड़ादायक है और धार्मिक मर्यादाओं के पूर्णतः विरुद्ध है। इस तरह का व्यवहार केवल व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और पूरे धर्म का अपमान है।
नायब क़ाज़ी ने कहा कि संतों और धर्माचार्यों का सम्मान समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक नींव का आधार होता है। ऐसे मामलों से समाज में गलत संदेश जाता है और धार्मिक सौहार्द को गंभीर क्षति पहुँचती है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले में तत्काल, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं एक संन्यासी हैं और ऐसे में जगतगुरु व धर्माचार्यों के सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करना उनकी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।
नायब क़ाज़ी सैयद असगर अली ने प्रशासन से यह भी अपेक्षा जताई कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
माघ मेला जैसे पवित्र आयोजन में जगतगुरु और संतों के कथित अपमान का मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। नायब क़ाज़ी सैयद असगर अली का बयान इस बात का संकेत है कि इस घटना ने समाज के विभिन्न वर्गों को व्यथित किया है। अब सभी की नजरें सरकार और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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