लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश का विजन डॉक्यूमेंट पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसे जनता की व्यापक भागीदारी से बनाया गया है। इस दस्तावेज़ को तैयार करने में 98 लाख से ज्यादा सुझाव शामिल किए गए हैं, जो प्रदेश के 75 जिलों में ग्रासरूट स्तर पर सर्वे और संवाद के जरिए जुटाए गए।
सीएम योगी तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों से 36 पीठासीन अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश सिंह और यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस विजन डॉक्यूमेंट को तैयार किया गया। इसमें 500 जनप्रतिनिधियों (विधायक-विधान परिषद सदस्य) और 500 बुद्धिजीवियों को शामिल किया गया।
इनमें रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी, वरिष्ठ अधिकारी, कुलपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और समाज के विभिन्न वर्गों के विशेषज्ञ शामिल थे। एक वर्कशॉप के बाद इन सभी को 75 जिलों में भेजा गया, जहां आम जनता से संवाद कर सुझाव जुटाए गए।
सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए केवल संसद और विधानसभा ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में भी साल में कम से कम 30 बैठकें अनिवार्य होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सदन का समय बेहद कीमती होता है। लगातार व्यवधान और हंगामा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। सदन बहस, चर्चा और समाधान का मंच है, न कि अवरोध का।
योगी ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि सभी राजनीतिक दलों से बात कर सदन में होने वाले गतिरोध को दूर किया जाए।
उन्होंने कहा,
“हंगामा करना है तो सदन के बाहर करें। जनता हमें लोकतांत्रिक संस्थाओं के संरक्षक के रूप में देखती है, इसलिए हमें निष्पक्ष और जवाबदेह बनना होगा।”
विधायिका का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज को प्रतिनिधित्व देना है।
विधानसभाएं केवल कानून नहीं बनातीं, बल्कि समग्र विकास की दिशा तय करती हैं।
यूपी विधानसभा में अब प्रश्नकाल के दौरान 20 सवाल पूछे जाते हैं, जिससे ज्यादा विधायकों को बोलने का मौका मिलता है।
भाषा, वेशभूषा और खानपान अलग हो सकते हैं, लेकिन संसद पूरे देश की साझा भावना को जोड़ती है।
विकसित भारत–विकसित यूपी पर हुई बहस में 377 विधायक शामिल हुए, कई विधायक रातभर सदन में रहे।
सदन संचालन का अनुशासन पंचायतों तक लागू होना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत हुए हैं और कानून व्यवस्था के साथ बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश सिंह ने कहा कि कभी बीमारू राज्य कहलाने वाला यूपी आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है और नीति आयोग इसे फ्रंटर प्रदेश मानता है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में विधायिकाओं की सक्रिय भूमिका।
हर राज्य में साल में कम से कम 30 विधायी बैठकें सुनिश्चित करना।
विधायी कार्यों में टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग।
सहभागी शासन और आदर्श नेतृत्व को बढ़ावा देना।
सांसदों-विधायकों की डिजिटल और शोध क्षमता का विकास।
राष्ट्रीय विधायी सूचकांक (National Legislative Index) का निर्माण।
उत्तर प्रदेश का विजन डॉक्यूमेंट केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनभागीदारी से तैयार विकास का रोडमैप है। सीएम योगी का पंचायतों से संसद तक साल में 30 बैठक का प्रस्ताव लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सम्मेलन में लिए गए 6 संकल्प 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को संस्थागत मजबूती देने की आधारशिला साबित हो सकते हैं।
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