अजमेर: जिले के पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच से कई तीखे और चर्चित बयान दिए। उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यदि उनका जन्म किसी अन्य मजहब में हुआ होता तो वे “बिना फोटो के पूजा कर रहे होते।” उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा—“अपने बाप को बाप कहो, दूसरों के बाप को क्यों बाप बना रहे हो।” उनके इस बयान के बाद सभा में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं में उत्साह और समर्थन के स्वर सुनाई दिए।
पुष्कर के नए मेला मैदान में 23 से 25 फरवरी तक चल रही तीन दिवसीय हनुमंत कथा के दूसरे दिन की शुरुआत हनुमान आरती से हुई। “सीताराम गाइए” भजन की प्रस्तुति के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या पांडाल में मौजूद रही। आयोजन स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, क्योंकि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के शामिल होने की संभावना पहले से जताई गई थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म महान और अद्भुत है, जिसमें महिलाओं को पूज्य माना जाता है। उन्होंने कहा कि “हमारे यहां राम सीता नहीं, बल्कि सीताराम कहा जाता है,” जो भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत में जिसने जन्म लिया, वह सनातनी है और सभी को अपनी जड़ों से जुड़ना चाहिए।
उन्होंने अजमेर के हिंदुओं से आह्वान किया कि वे अपने “ग्रैंड फादर” के स्थान पुष्कर आया करें। उनके इस कथन को धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।
अपने संबोधन में शास्त्री ने कहा कि उन्हें यह देखकर आपत्ति होती है जब लोग “चादर चढ़ाने” जाते हैं। उन्होंने पुष्कर में एक मठ स्थापित करने की इच्छा जताई, ताकि स्थानीय हिंदू वहां आकर आध्यात्मिक मार्गदर्शन ले सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल सांस्कृतिक जागरण के लिए होगी।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी समुदाय को गाली देने से किसी अन्य समुदाय का महिमामंडन नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए फिल्म Amar Akbar Anthony का जिक्र किया और कहा कि फिल्म के अंत में तीनों भाइयों के पिता का नाम कन्हैयालाल था—इस उदाहरण के जरिए उन्होंने साझा सांस्कृतिक जड़ों की बात कही।
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने राम मंदिर निर्माण और केदारनाथ धाम के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि “ऐसा कार्य कोई और नहीं कर सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने अस्पताल निर्माण की बात प्रधानमंत्री से की, तो उन्होंने उद्घाटन में आने की इच्छा जताई और कहा कि “काम छोटा हो सकता है, लेकिन संदेश बड़ा है।”
उनका यह बयान सभा में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पहुंचे। कथा स्थल पर मुख्यमंत्री को पारंपरिक रूप से हल भेंट किया गया। उनके साथ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान शक्ति और भक्ति की धरती है। उन्होंने कहा कि सरकार सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। पुष्कर के विकास के लिए डीपीआर तैयार हो चुकी है और प्रदेश के मंदिरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि प्रथम चरण में विकास कार्य शुरू हो सकें।
उन्होंने कहा कि “राजनीति होती है, लेकिन उसका धर्म होना चाहिए,” और संस्कृति में सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा पर बल दिया।
मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए सीएम सिक्योरिटी की टीम ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। मंच, डोम और वीआईपी एरिया की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई। आयोजन समिति ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पार्किंग और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
कथा से पहले आयोजन को लेकर शुल्क और वीआईपी पास के नाम पर कथित वसूली की शिकायतें सामने आई थीं। इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की फर्जी वसूली से सावधान रहें और सीधे आयोजन समिति से संपर्क करें।
पुष्कर के नए मेला मैदान में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। कथा स्थल पर भक्ति गीतों की धुन, जयकारों की गूंज और रंग-बिरंगे परिधानों में सजे श्रद्धालु आध्यात्मिक माहौल को जीवंत कर रहे थे। महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को समर्थकों ने धार्मिक जागरण का संदेश बताया, वहीं आलोचकों ने इसे विवादास्पद करार दिया। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी समुदाय को अपमानित कर दूसरे का महिमामंडन नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों का सामाजिक प्रभाव व्यापक होता है—जहां धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श भी जुड़ जाता है।
पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दूसरे दिन धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयानों ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा को जन्म दिया। सनातन धर्म, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता पर दिए गए उनके संदेश को समर्थकों ने उत्साह से सुना, जबकि कुछ बयान विवाद का कारण भी बने। मुख्यमंत्री और मंत्रियों की मौजूदगी ने आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। आने वाले दिनों में यह कथा और इससे जुड़े बयान प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.