Bandikui (दौसा): क्षेत्र की ग्राम पंचायत झोपड़ीन में इस वर्ष धूलंडी का पर्व बेहद उत्साह, उमंग और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। रंगों के इस त्योहार ने पूरे गांव को एकता और प्रेम के रंग में रंग दिया। ग्राम पंचायत झोपड़ीन के सरपंच गुठल सिंह कांवर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने घर-घर जाकर लोगों को धूलंडी की शुभकामनाएं दीं और वर्षों पुरानी “राम-श्यामा” की परंपरा को निभाया।
धूलंडी के दिन सुबह से ही गांव का माहौल उत्सवमय हो गया था। ढोल-नगाड़ों की गूंज और लोकगीतों की मधुर धुनों के बीच गांव के लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते नजर आए। गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मना रहे थे।
ग्राम पंचायत के सरपंच गुठल सिंह कांवर स्वयं ग्रामीणों के साथ गांव के हर मोहल्ले और घर तक पहुंचे। उन्होंने बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और महिलाओं व युवाओं को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
सरपंच ने इस दौरान कहा कि होली का त्योहार केवल रंगों का नहीं बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। गांव के लोग एक साथ मिलकर जब इस पर्व को मनाते हैं तो समाज में सौहार्द और समरसता का संदेश फैलता है।
इस घर-घर संपर्क कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और रंगों के साथ खुशियां बांटी। कई स्थानों पर लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य का आयोजन भी हुआ, जिसने माहौल को और भी आनंदमय बना दिया।
इस उत्सव के दौरान सरपंच और ग्रामीण वरिष्ठ पत्रकार रतिराम जी के घर भी पहुंचे। वहां भी गुलाल लगाकर उन्हें होली की शुभकामनाएं दी गईं। इस मौके पर मिठाइयों का वितरण किया गया और सभी ने मिलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
पत्रकार रतिराम जी ने भी ग्रामीणों का स्वागत करते हुए कहा कि गांव की यह परंपरा आपसी भाईचारे की मिसाल है। जब पूरा गांव एक परिवार की तरह एक-दूसरे के घर जाकर पर्व मनाता है तो सामाजिक रिश्ते और भी मजबूत होते हैं।
धूलंडी के इस आयोजन में गांव के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। रंगों की फुहारों और गुलाल की खुशबू से पूरा गांव सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर कही गई कुछ पंक्तियों ने माहौल को और भी भावुक बना दिया—
"रंगों में घुली जब अपनापन की बात,
हर दिल से मिट गई दूरी की रात।
गुलाल की खुशबू ने ये पैगाम दिया,
होली है प्रेम, भाईचारे की सौगात।"
इन पंक्तियों ने इस पर्व के असली संदेश को जीवंत कर दिया।
गांव में आयोजित इस धूलंडी कार्यक्रम का उद्देश्य केवल त्योहार मनाना ही नहीं बल्कि लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना भी था। सरपंच और ग्रामीणों द्वारा घर-घर जाकर लोगों से मिलना और उन्हें शुभकामनाएं देना गांव की सामाजिक एकता का प्रतीक बना।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आयोजन गांव में प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनाते हैं। इससे लोगों के बीच आपसी दूरी कम होती है और समाज में एकजुटता बढ़ती है।
इस वर्ष की धूलंडी में पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के उत्सव का संगम देखने को मिला। जहां एक ओर लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की धुनों पर लोग झूमते नजर आए, वहीं दूसरी ओर युवा वर्ग ने रंगों के साथ आधुनिक संगीत का भी आनंद लिया।
पूरा गांव एक बड़े परिवार की तरह इस पर्व को मनाता हुआ दिखाई दिया। हर घर के दरवाजे खुले थे और हर आंगन में रंगों की खुशबू फैली हुई थी।
ग्राम पंचायत झोपड़ीन में मनाई गई धूलंडी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बनकर सामने आई। सरपंच गुठल सिंह कांवर के नेतृत्व में आयोजित घर-घर संपर्क कार्यक्रम ने गांव में आपसी प्रेम और सौहार्द को और मजबूत किया।
इस तरह के आयोजन ग्रामीण संस्कृति की सुंदर परंपराओं को जीवित रखते हैं और समाज में एकता का संदेश फैलाते हैं।
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