उत्तराखंड: की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक संदेश देखने को मिला, जब केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने हरिद्वार में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा के मिशन 2027 का चुनावी शंखनाद किया। इस जनसभा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपने संगठन और सरकार की रणनीति को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है।
भाजपा लगातार नौ वर्षों से उत्तराखंड में सत्ता में है और अब तीसरी बार जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने चुनावी अभियान की शुरुआत धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर Haridwar से की।
भाजपा नेतृत्व ने जनसभा के लिए हरिद्वार को यूं ही नहीं चुना। इसके पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरण काम कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि हरिद्वार से दिया गया राजनीतिक संदेश पूरे राज्य में प्रभाव डाल सकता है।
पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से भाजपा को केवल तीन सीटों पर ही जीत मिली थी। बाकी सीटों पर कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा। ऐसे में भाजपा इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति बना रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हरिद्वार जिले में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। जिले की 11 सीटों में से केवल हरिद्वार, भेल रानीपुर और रुड़की सीटें ही भाजपा के खाते में आई थीं।
इस वजह से पार्टी इस जिले को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मान रही है। अमित शाह की जनसभा का उद्देश्य कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और संगठन को मजबूत करना बताया जा रहा है।
हरिद्वार को हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां से उठने वाला धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश पूरे देश में प्रभाव डालता है।
भाजपा की रणनीति है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत की जाए। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि हरिद्वार से शुरू किया गया अभियान पूरे राज्य में सकारात्मक माहौल बना सकता है।
उत्तराखंड की राजनीति में मैदानी जिलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में बड़ी आबादी रहती है और यहां से विधानसभा की कई सीटें तय होती हैं।
पिछले चुनावों में इन क्षेत्रों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को काफी समर्थन मिला था। इसलिए भाजपा इन जिलों में संगठन को मजबूत करने और जनसमर्थन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अपने चार साल पूरे होने का जश्न मना रही है।
जनसभा में राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को भी जनता के सामने रखा गया। इसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), सख्त धर्मांतरण कानून, नकलरोधी कानून और दंगारोधी कानून जैसे फैसलों को प्रमुखता से गिनाया गया।
भाजपा का उद्देश्य इन फैसलों के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना है।
जनसभा के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। यह बैठक एक निजी होटल में हुई, जिसमें पार्टी के कोर ग्रुप के सदस्य शामिल हुए।
इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Bhatt, संगठन महामंत्री अजय कुमार और कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। माना जा रहा है कि अमित शाह ने पार्टी नेताओं को तीसरी बार जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी जीत का आधार मजबूत संगठन और सक्रिय कार्यकर्ता होते हैं। इसलिए जनसभा और बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने और उन्हें आगामी चुनावों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी की योजना है कि आने वाले महीनों में राज्यभर में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
हरिद्वार में आयोजित अमित शाह की जनसभा को उत्तराखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। भाजपा ने यहां से मिशन 2027 का चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हरिद्वार को चुनकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंकने वाली है।
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