लखनऊ: के कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब यह मुद्दा राजनीतिक रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मामले पर तीखा तंज कसते हुए नगर निगम और प्रदेश सरकार को घेरा है।
लखनऊ में पत्रकार वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि अगर नगर निगम में गंदे लोग बैठे हैं, तो वहां गंदा पानी नहीं आएगा तो क्या आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं और सरकार आम जनता की बुनियादी जरूरतों तक पर ध्यान नहीं दे रही है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि गोमती नदी जितनी गंदी है, उतनी ही गंदी बीजेपी हो गई है। उन्होंने लखनऊ की जल व्यवस्था को बदहाल बताते हुए कहा कि सरकार केवल दावे कर रही है, जबकि हकीकत में लोग बीमार पड़ रहे हैं।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में अखिलेश यादव ने केजीएमयू में मजार हटाने के मुद्दे पर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर यही सोच है तो केजीएमयू को ही तोड़ देना चाहिए, क्योंकि उसे भी क्रिश्चियन लोगों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर सब कुछ नया बनाना पड़ेगा।
गंदे पानी की शिकायतों के बाद प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने करीब एक सप्ताह पहले शहर के कई इलाकों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई स्थानों पर सीवर लाइन के पास से पानी की पाइपलाइन गुजर रही है, जिससे दूषित पानी सप्लाई हो रहा है।
मंत्री ने अधिकारियों को पाइपलाइन तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि 30 जनवरी के बाद दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि खामियां पाई गईं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने पर जोनल अधिकारियों से लेकर सुपरवाइजर तक की दो दिन की सैलरी काटने के आदेश भी दिए गए थे।
लखनऊ के हुसैनगंज, उदयगंज, पुराना बर्फखाना, त्रिवेणीनगर और पुराने लखनऊ के कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें सामने आई हैं। इन इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदा पानी पीने से बच्चे और बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि गंदे पानी के कारण लीवर सिरोसिस, पेट की गंभीर बीमारियां और संक्रमण फैल रहा है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को पीने का पानी बाहर से खरीदना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद जलकल विभाग की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा।
जलकल विभाग का कहना है कि शहर के कई इलाकों में पिछले एक सप्ताह से ओवरहेड टैंकों की सफाई कराई जा रही है। इसी वजह से पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जलकल विभाग के जीएम कुलदीप सिंह ने कहा कि जहां भी शिकायत मिल रही है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।
लखनऊ में गंदे पानी की आपूर्ति अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। एक ओर लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और नगर निगम इस समस्या का कितना प्रभावी समाधान कर पाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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