भारत: ग्लोबल पॉलिटिक्स में एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है। यह बात यूरोपियन यूनियन के शीर्ष नेतृत्व ने खुले मंच से कही है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष डिनर के दौरान यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत अब वैश्विक राजनीति के केंद्र में है और यह एक ऐसा विकास है जिसका यूरोप पूरी मजबूती से स्वागत करता है।
मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में भव्य डिनर का आयोजन किया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल समेत देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
यह डिनर केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत ग्लोबल पॉलिटिक्स में अपनी बढ़ती भूमिका और भारत-यूरोप रणनीतिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत भी था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत और यूरोप की सोच और दृष्टिकोण काफी हद तक समान है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक शांति, आर्थिक अस्थिरता और सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल सामूहिक प्रयासों और सहयोग से ही किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत और यूरोप दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं।
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यदि भारत और यूरोप अपने संसाधनों, तकनीक और क्षमताओं को एक साथ लाते हैं, तो वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव संभव हैं।
उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल पॉलिटिक्स में टॉप पर पहुंच गया है, और यही वजह है कि यूरोप भारत के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहता है।
उर्सुला ने भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को एक ऐतिहासिक मोड़ बताया और कहा कि यह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, स्थिरता और साझा भविष्य की नींव है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव, संघर्ष और मतभेद बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में भारत और यूरोप संवाद, सहयोग और तालमेल का रास्ता चुन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर स्थिरता बढ़ेगी, निवेशकों को भरोसा मिलेगा और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
उनके अनुसार, भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक राजनीति को संतुलन और दिशा दे सकते हैं।
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में भारत-यूरोप की रणनीतिक साझेदारी का आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व बेहद बड़ा है।
उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, डिफेंस पार्टनरशिप और 2030 के लिए जॉइंट स्ट्रैटजिक एजेंडा, वैश्विक मुद्दों पर सहकारी नेतृत्व का एक मजबूत उदाहरण है।
कोस्टा ने शिखर सम्मेलन से निकले नतीजों पर गर्व जताया और इसे एक सॉलिड डेवलपमेंट बताया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर में भारतीय संस्कृति और हिमालयी खानपान को विशेष रूप से दर्शाया गया। मेन्यू में याक चीज, गुच्छी, जाखिया आलू, झांगोरा की खीर, सोलन मशरूम और हिमाचली स्वर्णु चावल जैसी पारंपरिक डिशेस शामिल थीं।
डेजर्ट में हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक, सी बकथॉर्न क्रीम और हिमालयी शहद के साथ परोसा गया परसिमन खास आकर्षण रहा।
ये व्यंजन शेफ प्रतीक साधु और कमलेश नेगी के सहयोग से तैयार किए गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, लोकतांत्रिक ढांचा और संतुलित विदेश नीति ने उसे ग्लोबल पॉलिटिक्स का प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है।
चाहे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र हो, वैश्विक व्यापार हो या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा—भारत की भूमिका अब निर्णायक मानी जा रही है। यही वजह है कि यूरोप जैसे बड़े वैश्विक ब्लॉक भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह डिनर भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है। यूरोपियन यूनियन द्वारा यह स्वीकार करना कि भारत ग्लोबल पॉलिटिक्स में टॉप पर पहुंच चुका है, भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में भारत-यूरोप साझेदारी वैश्विक राजनीति को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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