जयपुर: बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जयपुर स्थित ईडी कोर्ट में पेश किया। ईडी ने कोर्ट से बलजीत यादव का रिमांड मांगा, जबकि उनके वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। मामले की सुनवाई विशेष ईडी कोर्ट के जज खगेंद्र कुमार शर्मा ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने लंच के बाद आगे की सुनवाई तय की।
कोर्ट में पेशी के दौरान बलजीत यादव ने खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भाजपा विधायक उन्हें जानबूझकर फंसाना चाहता है।
कोर्ट लाए जाने के दौरान बलजीत यादव ने कहा कि उन्हें राजनीतिक बदले की भावना के तहत फंसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहरोड़ के मौजूदा विधायक जसवंत यादव अपने बेटे को विधायक बनाना चाहते हैं और इसी उद्देश्य से उनके खिलाफ झूठे मामले गढ़े गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उस व्यक्ति से संपत्ति विवाद चल रहा है, जिसके खाते में कथित तौर पर पैसा गया है।
पूर्व विधायक पर स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD Fund) से 3 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के गबन और दुरुपयोग का आरोप है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की है।
ईडी ने मंगलवार रात अलवर जिले के शाहजहांपुर टोल प्लाजा, जो दिल्ली-जयपुर हाईवे पर NHAI कार्यालय के पास स्थित है, वहां से बलजीत यादव को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए जयपुर स्थित ईडी कार्यालय लाया गया, जहां लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
बलजीत यादव के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि जिन फर्मों के जरिए पैसे के लेन-देन की बात कही जा रही है, उनसे बलजीत यादव का पहले से संपत्ति विवाद चल रहा है। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत अखबारों में प्रकाशित की गई थी, जिसमें बलजीत यादव की कोई सीधी भूमिका नहीं थी।
वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि पंचायत समिति द्वारा टेंडर जारी किए गए थे और अगर बलजीत यादव भाजपा में शामिल हो जाते, तो उनके खिलाफ यह कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए ईडी के रिमांड की मांग का विरोध किया।
ईडी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि बलजीत यादव ने खुद फर्जी फर्म बनवाकर सरकारी फंड को डायवर्ट किया। ईडी ने आगे की जांच के लिए 6 दिन की रिमांड की मांग की है।
ईडी के अनुसार, साल 2023 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी बलजीत यादव के खिलाफ छापेमारी की थी, जिसमें खेल सामग्री सहित कई दस्तावेज बरामद हुए थे।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, जनवरी 2025 में जयपुर, दौसा और बहरोड़ में बलजीत यादव से जुड़े कुल 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इनमें जयपुर में 8, जबकि दौसा और बहरोड़ में एक-एक ठिकाना शामिल था। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत मिले, जिनके आधार पर गिरफ्तारी की गई।
जांच में सामने आया कि साल 2021-22 में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट खरीदी गई थीं। इन खरीदों के नाम पर विधायक निधि से करीब 3.72 करोड़ रुपए खर्च किए गए। आरोप है कि कई मामलों में या तो सामग्री की आपूर्ति नहीं हुई या घटिया सामान देकर भुगतान कर लिया गया।
इस मामले में पहले ही ACB ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की। जांच में फर्जी बिलिंग, ठेकेदारों से मिलीभगत और सरकारी धन के गबन जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
गौरतलब है कि बलजीत यादव जब बहरोड़ से निर्दलीय विधायक थे, तब उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला नेता बताया था। उन्होंने जयपुर के सेंट्रल पार्क में काले कपड़े पहनकर दिनभर दौड़ लगाते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने क्षेत्र में पोस्टर लगवाकर भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को 51 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी की थी।
अब वही नेता करोड़ों रुपए के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में ईडी की गिरफ्त में है।
बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव का मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों रुपए के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग की गंभीर जांच में बदल चुका है। एक ओर बलजीत यादव इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं ईडी फर्जी फर्म और सरकारी फंड डायवर्जन के पुख्ता सबूत होने का दावा कर रही है। अब कोर्ट के फैसले और रिमांड के बाद की जांच पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
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