राजस्थान: के झुंझुनूं जिले में 12वीं बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन ‘मुन्नाभाई’ स्टाइल का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अंग्रेजी के पेपर के दौरान एक डमी छात्र पकड़ा गया, जो अपने मामा की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। लेकिन एक छोटी सी गलती ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए मामा और भांजे दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मामला बुहाना ब्लॉक के धूलवा गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा केंद्र का है। यहां 19 वर्षीय आशीष पुत्र पवन कुमार अपने मामा संजय की जगह 12वीं बोर्ड की परीक्षा देने पहुंचा था। प्रवेश पत्र दिखाकर वह परीक्षा कक्ष में बैठ भी गया, लेकिन जब उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) पर हस्ताक्षर और फोटो का मिलान किया गया, तो दोनों में मिसमैच पाया गया।
परीक्षा पर्यवेक्षकों को शक हुआ और तुरंत जांच की गई। इसके बाद पूरा मामला सामने आ गया।
बुहाना सीआई बिमला बुडानिया के अनुसार, आरोपी आशीष हरियाणा के बहल थाना क्षेत्र के बिधनोई गांव का निवासी है। उसका मामा संजय (20) पुत्र शेरसिंह, बहल थाना इलाके के बड़दूमुगल गांव का रहने वाला है। संजय 12वीं की परीक्षा में बैठने वाला अभ्यर्थी था, लेकिन पढ़ाई में कमजोर होने के कारण उसने अपने भांजे की मदद लेने का फैसला किया।
जानकारी के मुताबिक, संजय 10वीं में मात्र 33 प्रतिशत अंकों से पास हुआ था, जबकि आशीष 12वीं में 76 प्रतिशत अंक प्राप्त कर चुका है और फिलहाल कॉलेज के प्रथम वर्ष में अध्ययनरत है।
संजय एक निजी स्कूल ‘बाबा मामचंद उच्च माध्यमिक विद्यालय’ (ठोठी गांव) का नियमित विद्यार्थी बताया गया है। इस स्कूल के 8-9 छात्र धूलवा परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से कई विद्यार्थी परीक्षा में उपस्थित नहीं हो रहे थे और अधिकांश हरियाणा से संबंधित हैं।
इस खुलासे के बाद संबंधित स्कूल की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। शिक्षा विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि हरियाणा में 12वीं बोर्ड परीक्षा में थ्योरी के 80 अंकों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। वहीं राजस्थान में 20 अंकों के सत्रांक (Internal Marks) जुड़ने के कारण थ्योरी में अपेक्षाकृत कम अंक लाकर भी कुल 33 प्रतिशत प्राप्त किए जा सकते हैं। इस अंतर का फायदा उठाने की कोशिश की आशंका भी जताई जा रही है।
पुलिस ने मौके से आशीष को हिरासत में लिया, जबकि संजय परीक्षा केंद्र के बाहर घूमता मिला। पूछताछ में संजय ने स्वीकार किया कि उसने जानबूझकर अपने भांजे को परीक्षा दिलाने भेजा था। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
झुंझुनूं का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि परीक्षा में नकल या डमी कैंडिडेट के जरिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश कितनी भारी पड़ सकती है। एक छोटी सी गलती—अटेंडेंस शीट पर साइन और फोटो का मेल न खाना—ने पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया। अब पुलिस और शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल था।
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