जयपुर। राजस्थान विधानसभा में उद्योग, युवा और खेल की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सियासी माहौल गरमा गया। बीजेपी विधायक महंत बालकनाथ ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली अशोक गहलोत सरकार ने “गोहत्यारों को 50 लाख रुपए दिए”। उनके इस बयान पर सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
बालकनाथ ने उदयपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले में आरोपियों को बचाने का काम किया गया। उनके बयान के बाद कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने बहस के दौरान पलटवार करते हुए कहा कि अगर बीजेपी को महात्मा गांधी से इतनी परेशानी है तो नोटों से उनकी तस्वीर हटा दे। उन्होंने कहा कि सिर्फ योजनाओं से नाम हटाने से इतिहास नहीं बदलेगा।
मेहर ने दिल्ली में आयोजित एआई समिट का भी मुद्दा उठाया और एक विश्वविद्यालय द्वारा कथित रूप से नकली रोबोट पेश किए जाने का मामला सदन में गूंजा। उन्होंने इसे देश की प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने ऑनलाइन सट्टे के मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी कंपनियों से जुड़े आर्थिक हितों की जांच होनी चाहिए।
चांदना ने कहा कि बेरोजगारी, नशा और ऑनलाइन सट्टा प्रदेश के युवाओं के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि छोटे-छोटे गांवों तक नशा पहुंच चुका है और ऑनलाइन सट्टे में पैसे हारने के बाद युवा कर्ज और अपराध की ओर बढ़ रहे हैं।
अचरोल में सैटेलाइट अस्पताल से जुड़े सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के जवाब से कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं दिखे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंत्री पर सवाल को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया।
मंत्री ने कहा कि संबंधित भूमि हेरिटेज श्रेणी में आती है और नई जमीन के लिए जेडीए को पत्र लिखा गया है। इस पर कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया।
नोहर क्षेत्र में बायपास के अलाइनमेंट बदलाव को लेकर डिप्टी सीएम दीया कुमारी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच तीखी बहस हुई। सरकार ने किसानों की आपत्तियों के कारण नया अलाइनमेंट अपनाने की बात कही, जबकि विपक्ष ने लागत वृद्धि और संभावित दुर्घटनाओं पर सवाल उठाए।
गुरुवार को सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर वासुदेव देवनानी को कई बार हस्तक्षेप कर विधायकों को शांत कराना पड़ा।
राजस्थान विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा सियासी टकराव में बदल गई। बालकनाथ के आरोप, गांधी की तस्वीर पर बयान, ऑनलाइन सट्टे और नशे का मुद्दा, तथा स्वास्थ्य और बायपास परियोजनाओं पर उठे सवाल—इन सबने सदन को गर्माए रखा। विपक्ष जहां सरकार को जवाबदेह ठहराने में जुटा है, वहीं सत्तापक्ष पिछली सरकार के फैसलों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले सत्रों में यह टकराव और तेज होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।
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