प्रधानमंत्री का स्वागत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, समावेशिता और वैश्विक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स की कॉन्फ्रेंस भारत में आयोजित हो रही है। इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय है –
“संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी”।
उन्होंने कहा कि भारत आज गर्व के साथ कह सकता है कि देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में भागीदारी कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका भी निभा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने 2024 के आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था।
करीब 98 करोड़ नागरिकों ने वोट के लिए पंजीकरण कराया
8,000 से अधिक उम्मीदवार
700 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां
महिलाओं की रिकॉर्ड मतदान भागीदारी
उन्होंने कहा कि यह संख्या कई महाद्वीपों की कुल आबादी से भी अधिक है।
पीएम मोदी ने कहा कि जिस सेंट्रल हॉल में यह सम्मेलन हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है।
यहीं आजादी से पहले संविधान सभा की बैठकें हुईं और आजादी के बाद 75 वर्षों तक यह भारत की संसद रही।
अब इसे “संविधान सदन” नाम दिया गया है, जो पूरी तरह लोकतंत्र को समर्पित है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
UPI दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता
वैश्विक इस्पात उत्पादन में दूसरा स्थान
उन्होंने कहा कि भारत ने साबित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं विकास को स्थिरता, गति और पैमाना प्रदान करती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
स्पीकर कम बोलते हैं लेकिन सभी की बात सुनते हैं, निष्पक्षता बनाए रखते हैं और सदन में संतुलन व गरिमा सुनिश्चित करते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि भारत में लोकतंत्र को जन-केंद्रित नीतियों और कल्याणकारी कानूनों के जरिए मजबूत किया गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक 1500 से अधिक पुराने और बेकार कानून खत्म किए जा चुके हैं और नए कल्याणकारी कानून लागू किए गए हैं।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि भारतीय संसदीय व्यवस्था संवाद, बहस और असहमति की परंपरा से मजबूत हुई है।
उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार को भारत की लोकतांत्रिक सोच का आधार बताया।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं।
सम्मेलन में कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, मलेशिया सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
CSPOC 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, समावेशिता और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।
भारत ने यह साबित किया है कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की नींव है।
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