राजस्थान विधानसभा: में मंगलवार को उस समय सियासी तापमान बढ़ गया, जब महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट के विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। मुद्दा था—दो साल में घोषित 100 करोड़ रुपए की योजना में से केवल 2 लाख 83 हजार रुपए खर्च होने का। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पर सवाल उठाए तो डिप्टी सीएम और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने पलटवार करते हुए पिछली सरकार को घेरा।
यह बहस सिर्फ खर्च के आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विकास की समयसीमा, डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट), और पर्यटन के जरिए ऐतिहासिक विरासत को सहेजने जैसे बड़े मुद्दों तक जा पहुंची।
महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट से जुड़े बीजेपी विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के सवाल के जवाब में दीया कुमारी ने कहा कि योजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है और अब बड़े स्तर पर काम शुरू होगा। लेकिन नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तुरंत सवाल दागा—
“आपकी 2024-25 की घोषणा थी। आपने 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। लेकिन दो साल में सिर्फ 2 लाख 83 हजार रुपए खर्च हुए। आखिर काम कब पूरा होगा?”
जूली का कहना था कि बजट में बड़ी घोषणा करने के बाद धरातल पर प्रगति नहीं दिख रही है। उन्होंने स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने जवाब देते हुए कहा—
“अभी तो डीपीआर बनी है। 100 करोड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन अब हम 275.68 करोड़ रुपए खर्च करने वाले हैं। अगर जरूरत पड़ी तो एक हजार करोड़ भी कम नहीं होंगे। महाराणा प्रताप का गौरवशाली इतिहास है, हम इस योजना को भव्य रूप देंगे।”
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार ने पांच साल में इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं किया।
“इन्हें महाराणा प्रताप की इतनी चिंता थी, तो एक रुपया भी क्यों नहीं खर्च किया? हमारी सरकार ने आते ही पहले बजट में इसकी घोषणा की।”
टीकाराम जूली ने फिर सवाल उठाया—
“हम चाहते हैं कि महाराणा प्रताप पर खर्च हो, लेकिन कोई समय सीमा तो होगी? जनता जानना चाहती है कि यह परियोजना कब पूरी होगी?”
उनका कहना था कि दो साल तक डीपीआर की प्रक्रिया में समय लगना और फिर खर्च नगण्य रहना, यह प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है।
बहस के दौरान कांग्रेस विधायकों ने भी आपत्ति जताई। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी पूरक सवाल उठाए। इस पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने टोकाटाकी पर नाराजगी जताई और कहा—
“जब डीपीआर बन गई है तो काम शुरू होगा। बार-बार खड़ा होना सही नहीं है।”
सदन में सिर्फ पर्यटन सर्किट ही नहीं, बल्कि पशुपालन विभाग के आंकड़ों को लेकर भी तीखी नोकझोंक हुई। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि मोबाइल वेटरनरी यूनिट 24 फरवरी 2024 से शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी तक 36,549 पशुओं का इलाज किया जा चुका है।
मंत्री के अनुसार:
9 अक्टूबर 2024 से कॉल सेंटर शुरू हुआ
तीन मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित हैं
हर वैन प्रतिदिन औसतन 6 पशुओं का इलाज कर रही है
लेकिन टीकाराम जूली ने इन आंकड़ों को “फर्जी” करार दिया। उन्होंने कहा—
“तीन वैन रोज 6 पशुओं का इलाज करें तो यह आंकड़ा 36 हजार से ऊपर कैसे पहुंच गया? इसमें गड़बड़ी है, इसकी जांच होनी चाहिए।”
इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य मेवाड़ क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा देना है। यह सर्किट वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से जुड़े स्थलों को विकसित करने की योजना है।
इसमें प्रमुख रूप से निम्न क्षेत्रों का विकास प्रस्तावित है:
ऐतिहासिक दुर्ग और स्मारक
संग्रहालय और व्याख्या केंद्र
पर्यटक सुविधाएं (होटल, पार्किंग, गाइड सेंटर)
सड़क और आधारभूत ढांचा सुधार
सरकार का दावा है कि इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
इस बहस को सिर्फ विकास बनाम देरी के नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी रणनीति का हिस्सा भी है।
बीजेपी इसे “गौरव और विरासत” से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है
कांग्रेस “घोषणा बनाम वास्तविक काम” का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी वर्ष में ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने संकेत दिया है कि जल्द ही योजना के तहत जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। डीपीआर पूरी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी।
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह इस योजना की प्रगति पर नजर रखेगा और समय-समय पर सदन में सवाल उठाएगा।
राजस्थान विधानसभा में महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट को लेकर हुई बहस ने विकास कार्यों की पारदर्शिता और समयबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष खर्च और प्रगति की गति पर सवाल उठा रहा है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि 100 करोड़ से बढ़कर 275.68 करोड़ के प्रस्तावित खर्च का जमीनी असर कब और कैसे दिखता है।
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