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ट्रंप–मस्क और एप्सटीन फाइल्स का जिक्र कर क्या संदेश दे गए बाबा बागेश्वर? पुष्कर में धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर गूंजती रहीं तालियां

राजस्थान: की धार्मिक नगरी पुष्कर इन दिनों भक्ति और चर्चा—दोनों का केंद्र बनी हुई है। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहली बार यहां हनुमंत कथा का वाचन कर रहे हैं। 23 से 25 फरवरी तक चल रहे इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। लेकिन इस बार कथा सिर्फ धार्मिक संदेशों तक सीमित नहीं रही—यह वैश्विक राजनीति और चर्चित ‘एप्सटीन फाइल्स’ तक जा पहुंची।

प्रवचन के दौरान बाबा बागेश्वर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump, उद्योगपति Elon Musk और कुख्यात कारोबारी Jeffrey Epstein का उदाहरण देते हुए चिंता और संतोष पर संदेश दिया। उनके इस अंदाज ने श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता और तालियों की गूंज पैदा कर दी।


पुष्कर में पहली बार बागेश्वर धाम की कथा

विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुष्कर में पहली बार बागेश्वर धाम की भव्य हनुमंत कथा का आयोजन हो रहा है। आयोजकों के अनुसार, हजारों की संख्या में भक्त कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं। कथा पंडाल में धार्मिक भजन, मंत्रोच्चार और प्रवचन का माहौल है।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी कथा के पहले दिन बाबा से मुलाकात की। बताया गया कि व्यस्तता के चलते उन्हें करीब ढाई घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भी कथा में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।


‘एप्सटीन फाइल्स’ से चिंता पर संदेश

हनुमंत कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के आग्रह पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक निजी होटल के हॉल में विशेष प्रवचन दिया। इसी दौरान उन्होंने ‘एप्सटीन फाइल्स’ का जिक्र किया—जिसे लेकर अमेरिका सहित कई देशों में समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है।

बाबा ने कहा—

“जब अमेरिका का राष्ट्रपति ही टेंशन में बताया जा रहा है, तो आम आदमी को बेवजह चिंता पालने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने ट्रंप और एलन मस्क का उदाहरण देते हुए समझाया कि अपार धन, सत्ता और प्रसिद्धि होने के बावजूद व्यक्ति चिंताओं से मुक्त नहीं होता।


‘टेंशन लेने नहीं, देने आए हैं’

हल्के-फुल्के अंदाज में बाबा ने कहा—

“हम तो गांव के सरपंच भी नहीं हैं, फिर किस बात की टेंशन लें? हम टेंशन लेने नहीं, टेंशन देने आए हैं।”

उनकी इस टिप्पणी पर पंडाल तालियों से गूंज उठा। बाबा ने संतोष के महत्व पर जोर देते हुए कहा—

“जो मिला है वह कम नहीं है, जो नहीं मिला उसका कोई ग़म नहीं है, और जो मिलेगा वह सिर्फ एक ख्वाब है।”

श्रद्धालुओं ने उनके इन वाक्यों को जीवन दर्शन के रूप में ग्रहण किया और कई लोग इसे सोशल मीडिया पर साझा करते नजर आए।


वैश्विक उदाहरणों से स्थानीय संदेश

धीरेंद्र शास्त्री की शैली अक्सर चर्चा में रहती है। वे अपने प्रवचनों में समसामयिक घटनाओं और चर्चित हस्तियों का उदाहरण देकर आध्यात्मिक संदेश देते हैं। इस बार भी उन्होंने वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत के नामों का जिक्र कर चिंता और संतोष का संदेश दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शैली युवाओं और शहरी वर्ग को जोड़ने में मदद करती है, क्योंकि वे परिचित नामों के माध्यम से आध्यात्मिक बातों को समझ पाते हैं।


भीड़ और व्यवस्था

पुष्कर में कथा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात है। पार्किंग और मेडिकल सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है।

आयोजकों का दावा है कि कथा के तीन दिनों में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। होटल और धर्मशालाएं लगभग फुल हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिला है।


राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी हमेशा चर्चा का विषय रहती है। वसुंधरा राजे की मुलाकात और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन ने इस कथा को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

हालांकि बाबा ने अपने प्रवचन में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन वैश्विक नेताओं का उदाहरण देकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि चिंता और असंतोष का समाधान आध्यात्मिक दृष्टिकोण में है।


सोशल मीडिया पर चर्चा

बाबा के ट्रंप, मस्क और एप्सटीन से जुड़े बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। समर्थक इसे “आधुनिक उदाहरणों के जरिए दिया गया आध्यात्मिक संदेश” बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे विवादित मुद्दों को मंच पर लाने के रूप में देख रहे हैं।


संतोष बनाम महत्वाकांक्षा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन में यह भी कहा कि जीवन में संतोष का अभाव ही चिंता का मूल कारण है। उन्होंने समझाया कि दुनिया के सबसे सफल लोग भी मानसिक शांति की तलाश में रहते हैं।

उन्होंने कहा—

“धन और पद से ज्यादा जरूरी मन की शांति है। जो भीतर से शांत है, वही सच्चा समृद्ध है।”


निष्कर्ष:

पुष्कर में बागेश्वर धाम की हनुमंत कथा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समसामयिक संदर्भों के साथ आध्यात्मिक संदेश का मंच बन गई है। ट्रंप, मस्क और एप्सटीन जैसे वैश्विक नामों का उदाहरण देकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने यह बताने की कोशिश की कि चिंता और असंतोष हर स्तर पर मौजूद हैं—चाहे व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।

भीड़, राजनीतिक मौजूदगी और वायरल बयानों के बीच यह कथा राजस्थान में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके बयान किस तरह से सामाजिक और डिजिटल विमर्श को प्रभावित करते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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