साल 2026: का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण आज 3 मार्च को लग रहा है। ग्रहण से पहले ही सूतक काल शुरू हो चुका है, जिसके चलते देशभर के प्रमुख मंदिरों के कपाट मंगलवार सुबह मंगल आरती के बाद बंद कर दिए गए। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे मंदिरों के दरवाजे दोबारा खोले जाएंगे। इसके बाद भगवान का विशेष स्नान, शुद्धिकरण और श्रृंगार होगा तथा भोग आरती के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति मिलेगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3:21 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। यह खगोलीय घटना भारत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जिससे लोगों में खास उत्साह है।
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सुबह भस्मारती के दौरान विशेष होली उत्सव मनाया गया। यहां परंपरा के अनुसार ग्रहण के दौरान भी कपाट पूरी तरह बंद नहीं किए जाते। भक्तों ने भस्मारती में शामिल होकर रंगों के साथ महाकाल का आशीर्वाद लिया।
ग्रहण और सूतक काल के चलते देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों के पट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं:
आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई।
उत्तर प्रदेश के राम मंदिर जाने वाले मार्ग भी बंद कर दिए गए।
तमिलनाडु के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना ग्रहण समाप्ति तक स्थगित रही।
दिल्ली के लक्ष्मीनारायण मंदिर को भी मंगला आरती के बाद बंद कर दिया गया।
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में पूजा के बाद कपाट बंद कर दिए गए।
हिंदू परंपरा में ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान, मूर्ति स्पर्श, भोजन और शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, इसलिए मंदिरों के दरवाजे बंद रखे जाते हैं।
ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है। इसमें भगवान का अभिषेक, गंगाजल से स्नान, वस्त्र परिवर्तन और विशेष मंत्रोच्चार शामिल होते हैं।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है।
चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
पूर्ण चंद्र ग्रहण – जब पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है।
आंशिक चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा छाया में आता है।
उपछाया चंद्र ग्रहण – जब पृथ्वी की बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
आज का ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण है, इसलिए चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है। इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।
जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है तो वह विभिन्न रंगों में विभाजित हो जाता है। लाल रंग की तरंगदैर्ध्य अधिक होने के कारण वह चंद्रमा तक पहुंच जाती है, जबकि अन्य रंग वातावरण में बिखर जाते हैं। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा लालिमा लिए नजर आता है।
अंतरिक्ष एजेंसियों के अनुसार सामान्यतः एक साल में 2 चंद्र ग्रहण होते हैं, हालांकि कभी-कभी यह संख्या 3 भी हो सकती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण अपेक्षाकृत दुर्लभ होते हैं और औसतन किसी स्थान से हर 2-3 साल में दिखाई देते हैं।
3 मार्च 2026 का यह पूर्ण चंद्र ग्रहण धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक जिज्ञासा—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां देशभर में सूतक के कारण मंदिरों के कपाट बंद हैं, वहीं उज्जैन में महाकाल की भस्मारती और होली उत्सव ने आध्यात्मिक वातावरण को विशेष बना दिया है। शाम 7 बजे के बाद मंदिरों में फिर से पूजा-अर्चना शुरू होगी और श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
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