माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने बताया कि
कुल 502 स्कूल भवन जर्जर हैं।
212 स्कूल भवनों में बच्चों को बैठाना पूरी तरह असुरक्षित है।
इन स्कूलों के छात्रों को मरम्मत पूरी होने तक नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में भेजा जाएगा।
बाकी 290 स्कूलों में छात्रों को उसी स्कूल के दूसरे सुरक्षित कमरों में शिफ्ट किया जाएगा।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार—
प्रतापगढ़ में सबसे ज्यादा 26 स्कूल भवन जर्जर हैं।
बीकानेर में 18
बालोतरा में 16
झालावाड़ में 15 स्कूल भवन खराब स्थिति में पाए गए हैं।
राज्य के 34 जिलों में 290 जर्जर स्कूल भवनों की पहचान की गई है।
गौरतलब है कि पांच महीने पहले झालावाड़ के पिपलोदी गांव में जर्जर स्कूल भवन की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी लेते हुए कहा था—
“इस हादसे का जिम्मेदार मैं खुद हूं।”
इसके बाद प्रदेशभर में संभावित खतरे वाले स्कूल भवनों का विशेष सर्वे कर उन्हें चिन्हित किया गया।
शिक्षा विभाग के अनुसार—
छात्रों को सबसे नजदीकी सुरक्षित स्कूलों में भेजा जाएगा।
कोशिश होगी कि एक कक्षा के सभी छात्र एक ही स्कूल में पढ़ें।
प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक छात्रों के लिए अलग-अलग कक्षाएं संचालित होंगी, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
अगर किसी स्कूल में छात्रों की संख्या अधिक हो जाती है तो
सुबह और दोपहर की शिफ्ट में कक्षाएं चलाई जाएंगी।
इससे सभी बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से जारी रखी जा सकेगी।
महात्मा गांधी सरकारी स्कूल (MGGS) यदि किसी अन्य स्कूल परिसर में संचालित हो रहे हैं और वहां जगह की कमी है, तो
उन्हें भी आवश्यकता अनुसार किसी अन्य सुरक्षित स्कूल में शिफ्ट किया जा सकेगा।
राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। झालावाड़ हादसे के बाद सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय संभावित दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में अहम कदम है। अब चुनौती यह है कि मरम्मत कार्य समय पर पूरा हो और बच्चों की पढ़ाई बिना बाधा जारी रह सके।
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