जयपुर: राजधानी जयपुर के महेश नगर इलाके में सस्पेंड चल रहे एक लेक्चरर द्वारा ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक के परिजनों ने शव लेने से इनकार करते हुए SMS हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी के बाहर धरना शुरू कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि SOG अधिकारियों की प्रताड़ना और वसूली की वजह से लेक्चरर को यह कदम उठाना पड़ा।
बुधवार शाम अर्जुन नगर रेलवे फाटक के पास यह घटना हुई, जहां मनोहर लाल भादू (35) ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। मनोहर मूल रूप से जालोर जिले के सांचौर के खारा गांव के निवासी थे और वर्तमान में जयपुर के महेश नगर इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे।
मनोहर लाल भादू ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसे उन्होंने अपने दोस्तों को भेजा। इस नोट में लिखा गया है—
“मैं मरा नहीं हूं, पुलिस ने मेरी इरादतन हत्या की है।”
घटना के कुछ समय बाद ही यह सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस का कहना है कि वायरल नोट की सत्यता की जांच की जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मनोहर का शव करीब तीन घंटे तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा। इस दौरान तीन ट्रेनें शव के ऊपर से गुजर गईं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। मध्य प्रदेश निवासी चश्मदीद रवि ने बताया कि जब कोई नहीं आया तो उसने खुद शव को उठाकर ट्रैक से हटाया और पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर महेश नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी भिजवाया।
पुलिस के अनुसार, मनोहर लाल भादू सस्पेंड होने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उनकी पत्नी और तीन बच्चे गांव में रहते हैं। जयपुर में वह अकेले रहकर पढ़ाई कर रहे थे।
मृतक के चचेरे भाई भंवरलाल ने आरोप लगाया कि SOG के श्यामसुंदर और मुकेश सोनी लगातार मनोहर को परेशान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जब कोई पकड़ा जाता, तो मनोहर का नाम जोड़ दिया जाता था और उसे डराकर पैसे मांगे जाते थे। कई बार उसने दोस्तों से उधार लेकर पैसे दिए।
परिजन और रिश्तेदारों का कहना है कि पिछले 3–4 सालों से SOG के अधिकारी मनोहर से वसूली कर रहे थे। एक अधिकारी के ट्रांसफर के बाद दूसरा अधिकारी उसी काम को आगे बढ़ाता था।
परिवार ने साफ कहा है कि जब तक
दोषी SOG अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होता
परिवार को सरकारी नौकरी नहीं दी जाती
और उचित मुआवजा घोषित नहीं किया जाता
तब तक वे शव नहीं लेंगे।
महेश नगर थाना SHO सुरेश यादव ने बताया कि शव को मॉर्च्युरी में सुरक्षित रखा गया है। मृतक के पास से कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और सुसाइड नोट की भी पुष्टि की जा रही है।
जयपुर में सस्पेंड लेक्चरर की आत्महत्या अब सिर्फ एक सुसाइड का मामला नहीं रह गया है, बल्कि SOG की कार्यप्रणाली, पुलिस की जवाबदेही और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। परिवार की मांगें मानने या न मानने पर यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक व प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है।
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