जयपुर। जयपुर शहर के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र में अवैध धार्मिक निर्माण और अतिक्रमण को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने कड़ा विरोध जताया है। संगठनों के पदाधिकारियों ने निदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग से मुलाकात कर एक सामूहिक ज्ञापन सौंपते हुए अवैध निर्माण हटाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
संगठनों ने बताया कि जयपुर का परकोटा क्षेत्र न केवल राजस्थान बल्कि देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। यह क्षेत्र UNESCO की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। इसके बावजूद यहां लगातार अवैध निर्माण, अतिक्रमण और मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है।
विहिप और बजरंग दल ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय के 11 फरवरी 2015 के आदेश के अनुसार परकोटा और उसके आसपास 5 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध है। बावजूद इसके, न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
संगठनों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे न केवल कानून व्यवस्था बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि अवैध निर्माण से जयपुर परकोटा की ऐतिहासिक पहचान, स्थापत्य संरचना और सामाजिक संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। यह गतिविधियां भविष्य में शहर की विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती हैं।
संगठनों ने संविधान के अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51-ए (फ) का हवाला देते हुए कहा कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण राज्य का संवैधानिक दायित्व है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
विहिप और बजरंग दल ने पुरातत्व विभाग और प्रशासन से मांग की है कि
परकोटा क्षेत्र में हुए सभी अवैध निर्माण तुरंत हटाए जाएं
दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए
संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
जयपुर परकोटा में अवैध निर्माण का मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और कानून के सम्मान से जुड़ा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है, ताकि जयपुर की विश्व प्रसिद्ध धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
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