मध्य-पूर्व: में जारी भीषण युद्ध के बीच अब भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया है। भारत की ओर से विदेश सचिव Vikram Misri ने नई दिल्ली स्थित Embassy of Iran in New Delhi पहुंचकर ईरान के शीर्ष नेता को श्रद्धांजलि दी।
विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास में रखी गई शोक पुस्तिका (Condolence Book) पर हस्ताक्षर किए और दिवंगत नेता के प्रति संवेदना व्यक्त की। यह पहली बार है जब भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से खामेनेई के निधन पर प्रतिक्रिया दी है।
इस बीच, मध्य-पूर्व में चल रही जंग लगातार गंभीर होती जा रही है। इसी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान के एक युद्धपोत को श्रीलंका के पास टॉरपीडो हमले से डुबो दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत 28 फरवरी को हुए हमले में हुई थी। ईरानी अधिकारियों ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक पुष्टि की थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
खामेनेई के निधन के बाद ईरान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया। साथ ही दुनिया के कई देशों से संवेदना संदेश भी आने लगे। इसी क्रम में भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव Vikram Misri ईरानी दूतावास पहुंचे और उन्होंने शोक व्यक्त किया।
उन्होंने शोक पुस्तिका में लिखा कि खामेनेई का निधन ईरान के लिए एक बड़ी क्षति है और भारत ईरानी जनता के साथ इस कठिन समय में खड़ा है।
नई दिल्ली में स्थित Embassy of Iran in New Delhi में खामेनेई की याद में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजनयिक, अधिकारी और समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश सचिव Vikram Misri ने दूतावास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ईरान के राजनयिक अधिकारियों से मुलाकात भी की और कहा कि भारत-ईरान संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत का यह कदम कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि भारत के अमेरिका, इजराइल और ईरान—तीनों देशों से महत्वपूर्ण संबंध हैं।
इस युद्ध के बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। अमेरिका ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो हमले में डुबो दिया।
यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में हुआ। जानकारी के मुताबिक उस समय यह जहाज Galle से करीब 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था।
श्रीलंका की नौसेना के अनुसार इस हमले में अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। करीब 60 नाविक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो के जरिए किया गया था।
दिलचस्प बात यह है कि ईरानी युद्धपोत IRIS Dena हाल ही में भारत के दौरे से लौट रहा था।
यह जहाज Visakhapatnam में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और MILAN 2026 Naval Exercise में भाग लेने आया था।
18 फरवरी को यह भारत पहुंचा था और 25 फरवरी को वापस रवाना हुआ।
जब इस पर हमला हुआ तब यह जहाज श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत के लिए भी कूटनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकती है, क्योंकि जहाज अभी हाल ही में भारत के सैन्य कार्यक्रम से लौट रहा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी बड़े युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से सीधे युद्ध के दौरान डुबोया गया है।
इससे पहले आमतौर पर आधुनिक युद्धों में मिसाइलों और हवाई हमलों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता रहा है।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार यह हमला इस बात का संकेत है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब समुद्री मोर्चे तक फैल चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अब तक ईरान के करीब 20 युद्धपोतों को समुद्र में डुबो चुका है।
हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे यह जरूर साफ होता है कि समुद्री युद्ध तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि भारत के ईरान, अमेरिका और इजराइल—तीनों देशों के साथ अलग-अलग रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं।
भारत ईरान से ऊर्जा और व्यापारिक संबंध बनाए रखता है, जबकि अमेरिका और इजराइल उसके महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं।
ऐसे में भारत की कोशिश यही है कि वह संतुलित कूटनीतिक रुख बनाए रखे और किसी भी पक्ष के साथ सीधे टकराव से बचा रहे।
ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है।
खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद दुनिया भर में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत ने भी संवेदना व्यक्त करते हुए ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को सम्मान दिया है।
इसी बीच अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को डुबोने की घटना ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है।
अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह युद्ध क्षेत्रीय संघर्ष से बढ़कर वैश्विक तनाव का कारण बन सकता है।
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