राजस्थान: के Dausa जिले के महवा क्षेत्र में चारागाह भूमि को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव का मामला सामने आया है। कुतकपुर गांव के ग्रामीणों ने 220 केवी जीएसएस (ग्रिड सब स्टेशन) निर्माण के विरोध में गुरुवार को बड़ा प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण अपने गोवंश और भेड़-बकरियों के साथ पैदल कूच करते हुए Mahwa SDM Office पहुंचे और कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान पुलिस और युवाओं के बीच धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर जीएसएस बनाने की योजना है, वह गांव की चारागाह भूमि है। यदि यहां बिजली ग्रिड स्टेशन बना दिया गया तो मवेशियों के लिए चरने की जगह खत्म हो जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार कुतकपुर गांव में चारागाह भूमि पर जीएसएस निर्माण का विरोध पिछले करीब 168 दिनों से जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने पहले इस प्रोजेक्ट को खोहरा मुल्ला-मातासूला क्षेत्र में स्वीकृति दी थी, लेकिन बाद में इसे कुतकपुर की चारागाह भूमि में शिफ्ट कर दिया गया।
इस फैसले के बाद गांव के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और लगातार धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।
प्रदर्शन की शुरुआत Chamunda Mata Temple से हुई, जहां से सैकड़ों ग्रामीण पैदल कूच करते हुए महवा शहर की ओर रवाना हुए।
इस रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए। कई ग्रामीण अपने मवेशियों और भेड़-बकरियों को साथ लेकर चल रहे थे, ताकि प्रशासन को यह बताया जा सके कि चारागाह भूमि उनके जीवन और आजीविका के लिए कितनी जरूरी है।
रैली के दौरान लोगों ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी भी की।
जैसे ही पैदल कूच Mahwa SDM Office के पास पहुंचा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कार्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया।
इस पर कुछ युवाओं ने अंदर जाने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई।
स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
इस दौरान डिप्टी एसपी मनोहरलाल मीणा, थाना प्रभारी राजेंद्र और अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एसडीएम मनीषा रेशम को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन लेते समय महिलाओं ने उनसे अपनी मांगों का समाधान करने की सौगंध भी दिलाई। इस दौरान एसडीएम मुस्कुराते हुए दिखाई दीं और उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की मांग सरकार तक पहुंचाई जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पैदल कूच का नेतृत्व पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक महीने के भीतर चारागाह भूमि का आवंटन निरस्त नहीं किया गया, तो सर्वसमाज के लोग विधायक जनसुनवाई केंद्र के सामने धरना देंगे और समस्या के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के कारण Mahwa-Hindaun State Highway पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
सैकड़ों वाहन दोनों ओर फंस गए, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट किया और धीरे-धीरे यातायात व्यवस्था सामान्य करवाई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की चारागाह भूमि उनके पशुधन के लिए बेहद जरूरी है।
यदि यहां बिजली ग्रिड स्टेशन बना दिया गया, तो मवेशियों को चराने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
इससे गांव की पशुपालन आधारित आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
दौसा जिले के महवा क्षेत्र में चारागाह भूमि को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन और मवेशियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे।
वहीं प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और उचित समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर और भी बड़ा रूप ले सकता है।
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