इस अधिसूचना के साथ ही जयपुर जिले में पंचायत समितियों की कुल संख्या 22 हो गई है, जहां अगले वर्ष पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
पंचायत समितियों के पुनर्गठन के बाद बस्सी पंचायत समिति जिले की सबसे बड़ी पंचायत समिति बनकर उभरी है, जहां अब 41 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा—
झोटवाड़ा और शाहपुरा पंचायत समितियों में अब 19-19 ग्राम पंचायतें रह गई हैं।
जमवारामगढ़, चाकसू, चौमूं और आंधी पंचायत समितियों में 30 से अधिक ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
पुनर्गठन से प्रशासनिक संतुलन और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रतिनिधित्व का दावा किया जा रहा है।
जब राज्य सरकार ने इस वर्ष पंचायत समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की थी, तब जयपुर जिले में 19 पंचायत समितियां थीं। इसके बाद—
चौमूं,
रामपुरा-डाबरी,
अमरसर,
बांसखो
को नई पंचायत समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
इनमें से चौमूं और रामपुरा-डाबरी को नवंबर 2025 में पंचायत समिति का दर्जा देकर अधिसूचना जारी कर दी गई थी। जबकि अमरसर और बांसखो का मामला लंबित था। अब सरकार ने अमरसर को पंचायत समिति बनाते हुए अंतिम निर्णय ले लिया है।
| पंचायत समिति | ग्राम पंचायतों की संख्या | प्रस्तावित वार्ड |
|---|---|---|
| फागी | 26 | 15 |
| जमवारामगढ़ | 40 | 23 |
| आंधी | 34 | 19 |
| चाकसू | 32 | 17 |
| कोटखावदा | 27 | 15 |
| बस्सी | 41 | 25 |
| तूंगा | 25 | 15 |
| जालसू | 25 | 15 |
| जोबनेर | 28 | 19 |
| गोविंदगढ़ | 27 | 19 |
| दूदू | 25 | 15 |
| शाहपुरा | 19 | 15 |
| माधोराजपुरा | 25 | 15 |
| मौजमाबाद | 27 | 17 |
| सांभरलेक | 26 | 17 |
| झोटवाड़ा | 19 | 15 |
| आमेर | 25 | 21 |
| सांगानेर | 23 | 15 |
| किशनगढ़-रेनवाल | 26 | 19 |
| अमरसर (नई) | 22 | 15 |
| रामपुरा-डाबरी | 21 | 15 |
| चौमूं | 34 | 25 |
पंचायत समितियों के पुनर्गठन के साथ ही प्रशासन ने वार्डों का निर्धारण भी कर दिया है।
बस्सी और चौमूं पंचायत समितियों में सबसे ज्यादा 25-25 वार्ड प्रस्तावित किए गए हैं।
इसके अलावा जयपुर जिला परिषद में वार्डों की संख्या 51 से बढ़ाकर 57 करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
अमरसर को नई पंचायत समिति बनाए जाने के साथ ही जयपुर जिले का ग्रामीण प्रशासनिक ढांचा और मजबूत हुआ है। पंचायत समितियों और वार्डों के पुनर्गठन से आगामी पंचायत चुनावों में बेहतर प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों पर टिकी हैं, जहां बदले हुए नक्शे के साथ ग्रामीण राजनीति की नई तस्वीर सामने आएगी।
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